India-US Trade Deal 2026
India-US Trade Deal 2026: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर देश में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ एक ओर विपक्षी दल इसे किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं सरकार और निर्यातक इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर मान रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत के बाद हुए इस समझौते ने सामरिक और आर्थिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस डील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलना देश की 70% आबादी के साथ विश्वासघात है, जो खेती पर निर्भर है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी हमेशा से किसान विरोधी रही है और इस समझौते से मध्यम वर्ग भी महंगाई की चपेट में आएगा। उनके अनुसार, यह डील बिचौलियों और मुनाफाखोरों की एक नई जमात पैदा करेगी, जिससे अंततः किसान अपनी जमीनें कॉरपोरेट को बेचने पर मजबूर हो जाएंगे।
कांग्रेस ने भी इस डील पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणाएं सामरिक रूप से कई सवाल खड़े करती हैं। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि इस समझौते का पूरा मसौदा देश के सामने रखा जाए। विपक्ष का मानना है कि कृषि जैसे संवेदनशील सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलना घरेलू किसानों की कमर तोड़ सकता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार पर ऐसा क्या दबाव था कि आनन-फानन में यह फैसला लिया गया।
विपक्ष के विरोध के बीच, इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने इस समझौते का स्वागत किया है। फेडरेशन का कहना है कि टैरिफ में 50% से 18% तक की कटौती भारतीय चावल निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। इससे भारतीय चावल को अमेरिकी बाजार में पाकिस्तान और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बराबरी का मौका मिलेगा। व्यापारियों का मानना है कि इस कदम से भारतीय बासमती और अन्य किस्मों की मांग अमेरिका में तेजी से बढ़ेगी।
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कृषि और डेयरी क्षेत्र के जो हिस्से पहले से ‘प्रोटेक्टेड’ (संरक्षित) थे, वे आगे भी वैसे ही रहेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजाइन इन इंडिया’ के लिए नए द्वार खोलेगा। उन्होंने इसे MSMEs और कुशल कामगारों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी।
अमेरिकी प्रशासन इस डील को अपने ग्रामीण क्षेत्रों की समृद्धि के तौर पर देख रहा है। अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुकी रॉलिंस ने कहा कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में पहुंच मिलेगी, जिससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम होगा। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था। अमेरिका इस डील के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और भारत की बढ़ती आबादी की मांग को पूरा करने की योजना बना रहा है।
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