Green Shipping : केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत में ग्रीन शिपिंग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मंत्री ने समुद्री क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत कम-कार्बन समुद्री व्यापार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ग्रीन शिपिंग को लेकर सरकार का स्पष्ट रुख
सोनोवाल ने कहा कि वर्ष 2026 में ग्रीन शिपिंग केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक जरूरत बन चुकी है। दुनिया के कई देश समुद्री परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भी इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने बंदरगाहों को भविष्य में इस्तेमाल होने वाले स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधनों के लिए तैयार करने की जरूरत पर बल दिया।
राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र ने दी जानकारी
बैठक के दौरान ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoEGPS) ने अपने कार्यों और योजनाओं की जानकारी मंत्री के सामने रखी। केंद्र की ओर से समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने में मंत्रालय को दिए जा रहे सहयोग, चल रही परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान सरकार, शोध संस्थानों और समुद्री उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर पर खास ध्यान
समीक्षा बैठक में प्रस्तावित ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (RMI) ने कम और शून्य उत्सर्जन वाले शिपिंग कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में चल रहे कार्यों की जानकारी दी। प्रस्तुति में स्वच्छ समुद्री ईंधनों और नई तकनीकों को अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। ऐसे कॉरिडोर समुद्री परिवहन को कम कार्बन वाला बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तीन बंदरगाहों में ग्रीन बंकरिंग हब
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ने ग्रीन फ्यूल बंकरिंग हब को लेकर अपनी तैयारियों की जानकारी दी। इन बंदरगाहों पर वैकल्पिक और हरित समुद्री ईंधनों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। भविष्य में इन हब के जरिए स्वच्छ ईंधन से चलने वाले जहाजों को आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
तटवर्ती बिजली से कम होगा जहाजों का उत्सर्जन
कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने तटवर्ती विद्युत आपूर्ति यानी shore power की व्यवस्था को लेकर जानकारी साझा की। पोर्ट के कोयला टर्मिनलों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत बंदरगाह पर खड़े जहाज अपने इंजन चलाने के बजाय सीधे तट से बिजली ले सकते हैं। इससे जहाजों के इंजन संचालन के लिए ईंधन की खपत और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वच्छ और आधुनिक समुद्री क्षेत्र का लक्ष्य
सोनोवाल ने कहा कि ग्रीन बंकरिंग हब, वैकल्पिक ईंधन, तटवर्ती बिजली और ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर जैसी पहल भारत के समुद्री क्षेत्र को अधिक स्वच्छ और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की सफलता के लिए पूरे समुद्री पारितंत्र को मिलकर काम करना होगा। बंदरगाहों, उद्योगों, शोध संस्थानों और सरकार के बीच मजबूत सहयोग से भारत वैश्विक ग्रीन शिपिंग बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भविष्य के ईंधनों के लिए तैयार होंगे बंदरगाह
सरकार का जोर ऐसे समुद्री बुनियादी ढांचे के निर्माण पर है, जो भविष्य में कम और शून्य उत्सर्जन वाले ईंधनों की बढ़ती मांग को पूरा कर सके। इसके तहत बंदरगाहों पर वैकल्पिक ईंधनों के भंडारण, आपूर्ति और बंकरिंग से जुड़ी सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। साथ ही तटवर्ती बिजली जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर को मिलेगी गति
सोनोवाल का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब मंत्रालय देश के प्रमुख बंदरगाहों पर ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और स्वच्छ ईंधन बंकरिंग क्षमता विकसित करने पर जोर दे रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारतीय समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में हो रहे प्रयासों के अनुरूप तैयार करना है। मंत्रालय ग्रीन शिपिंग को भारत की भविष्य की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।
हितधारकों के साथ हुआ संवाद
कार्यक्रम के अंत में मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, बंदरगाह प्रतिनिधियों और संबंधित संस्थानों के बीच संवाद सत्र आयोजित हुआ। इसमें स्वच्छ ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधनों, बंदरगाहों की तैयारियों और भविष्य के ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर पर विचार-विमर्श किया गया। सरकार का लक्ष्य इन पहलों के जरिए भारतीय समुद्री क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार बनाना है।
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