Greenland crisis
Greenland Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख के कारण चर्चा में हैं। ट्रंप अब किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने कूटनीतिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि इस रणनीतिक क्षेत्र को हासिल करने के उनके प्रयासों का यूरोपीय संघ (EU) अधिक विरोध नहीं कर पाएगा। यह घटनाक्रम तब और गरमा गया जब डेनमार्क ने आर्कटिक द्वीप पर अपने अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए। ट्रंप ने इसके जवाब में कई यूरोपीय देशों पर आर्थिक प्रतिबंध और भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस में होने वाली बैठक से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए अपनी मंशा साफ कर दी। उन्होंने स्वशासी डेनिश क्षेत्र, ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी पुरानी इच्छा को दोहराया। ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यूरोपीय देश इसका बहुत अधिक विरोध करेंगे। रणनीतिक दृष्टि से यह हमारे पास होना ही चाहिए।” उनके इस बयान ने न केवल ट्रांस-अटलांटिक तनाव को बढ़ा दिया है, बल्कि नाटो (NATO) जैसे महत्वपूर्ण सैन्य गठबंधन की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण अनिवार्य है। हाल के वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की सैन्य और व्यापारिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है। वेनेजुएला में हुए अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन की सफलता के बाद ट्रंप के हौसले बुलंद हैं और वे अब जल्द से जल्द ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा कवच के दायरे में लाना चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि इस क्षेत्र को डेनमार्क के भरोसे छोड़ा गया, तो यह विरोधियों के लिए आसान रास्ता बन सकता है।
ट्रंप के इन बयानों और दावों ने पूरे यूरोपीय संघ में हलचल पैदा कर दी है। डेनमार्क की सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान बताया है। ग्रीनलैंड की राजधानी ‘नूक’ (Nuuk) और डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रीनलैंड कोई बिकाऊ संपत्ति नहीं है। यूरोपीय देशों की इस प्रतिक्रिया और विरोध से नाराज होकर ट्रंप ने अब आर्थिक युद्ध छेड़ने का संकेत दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में दरार आने की आशंका बढ़ गई है।
विरोध दबाने के लिए ट्रंप ने व्यापारिक शुल्कों का सहारा लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि आठ प्रमुख यूरोपीय देश ग्रीनलैंड सौदे का विरोध करना बंद नहीं करते, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से ब्रिटेन, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैक्स लगेगा। चेतावनी यह भी दी गई है कि यदि गतिरोध जारी रहा, तो 1 जून से इस टैक्स को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।
यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के इस कदम को “अस्वीकार्य” और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है। डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे दबाव में आकर अपनी जमीन का सौदा नहीं करेंगे। इस बीच, ब्रसेल्स से खबरें आ रही हैं कि यूरोपीय संघ भी अमेरिकी आयात पर जवाबी टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। यदि यह कूटनीतिक विवाद नहीं सुलझा, तो आने वाले महीनों में दुनिया एक बड़े आर्थिक टकराव की गवाह बन सकती है, जिसका केंद्र एक बर्फीला द्वीप ‘ग्रीनलैंड’ होगा।
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