Greenland Row
Greenland Row : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर में अपनी नीतियों से हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग्रीनलैंड की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का रणनीतिक स्थान अमेरिका द्वारा विकसित की जा रही ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रंप का मानना है कि इस विशाल द्वीप के बिना अमेरिकी सुरक्षा कवच अधूरा है। 2025 में दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात दोहरा रहे हैं।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड के वर्तमान संरक्षक डेनमार्क और सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि नाटो को डेनमार्क को ग्रीनलैंड से तुरंत बाहर कर देना चाहिए। ट्रंप ने डेनमार्क की सुरक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वहां की रक्षा के लिए मात्र “दो कुत्तों की स्लेज” (Dogsleds) का सहारा लिया जा रहा है, जो रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के सामने टिकने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि “दो कुत्ते के बच्चों से काम नहीं चलेगा,” और दावा किया कि केवल अमेरिका ही इस क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करता है, तो रूस या चीन इस पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। ट्रंप ने तर्क दिया कि रूस के विध्वंसक जहाज और चीन की पनडुब्बियां आर्कटिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने नाटो से मांग की है कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया जाए। ट्रंप का कहना है कि उनकी विशाल सैन्य शक्ति के बिना नाटो एक प्रभावी बल नहीं है और ग्रीनलैंड के अमेरिका के पास होने से यह गठबंधन और भी अधिक दुर्जेय बन जाएगा।
ट्रंप की इस नई चेतावनी ने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है, खासकर तब जब हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया बयान काफी गंभीर माना जा रहा है। नाटो के सदस्य देश और डेनमार्क इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या ट्रंप ग्रीनलैंड के मामले में भी किसी सैन्य या आक्रामक कूटनीति का सहारा ले सकते हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उन्हें ग्रीनलैंड के पूर्ण नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बनाई गई सैन्य शक्ति का हवाला देते हुए कहा कि वह अब इसे एक नए और उच्च स्तर पर ले जा रहे हैं। उनका मानना है कि ग्रीनलैंड का भौगोलिक स्थान अमेरिका को आर्कटिक क्षेत्र में अजेय बना देगा। हालांकि, डेनमार्क ने पहले भी ग्रीनलैंड को बेचने के प्रस्ताव को खारिज किया था, लेकिन ट्रंप के ताजा तेवर बताते हैं कि वह इस बार इसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह “अमेरिका फर्स्ट” नीति आर्कटिक में एक नए शीत युद्ध की शुरुआत कर सकती है।
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