GST Miracle
GST Miracle : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। मार्च 2026 में सकल माल एवं सेवा कर (GST) के संग्रह में 9 प्रतिशत की शानदार वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस उछाल के साथ ही मासिक जीएसटी राजस्व 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह तीसरा ऐसा अवसर है जब कर संग्रह इस विशाल आंकड़े के ऊपर पहुंचा है। यह उपलब्धि न केवल देश की आंतरिक खपत को दर्शाती है, बल्कि बेहतर कर अनुपालन (Tax Compliance) का भी प्रमाण है।
ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में कुल जीएसटी कलेक्शन ₹2,00,344 करोड़ रहा है। इस रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आयातित वस्तुओं (Imported Goods) की रही। आयात से प्राप्त राजस्व में 17.8 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो बढ़कर 53,861 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, अगर घरेलू मोर्चे की बात करें, तो यहां भी 5.9 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व सरकारी खजाने में जमा हुआ। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां वैश्विक दबाव के बावजूद तेज गति से चल रही हैं।
इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार द्वारा सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में की गई कटौती के बावजूद राजस्व बढ़ा है। उस समय लगभग 375 वस्तुओं पर टैक्स कम कर दिया गया था और स्लैब को सरल बनाकर मुख्य रूप से 5% और 18% की श्रेणियों तक सीमित किया गया था। शुरुआत में, नवंबर 2025 में राजस्व गिरकर 1.70 लाख करोड़ रुपये पर आ गया था, जिससे चिंताएं बढ़ी थीं। लेकिन उसके बाद से कर संग्रह में जो ‘रिकवरी’ देखी गई, उसने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। यह सिद्ध करता है कि कम टैक्स दरों से व्यापार सुगम होता है, जिससे अंततः संग्रह में वृद्धि होती है।
संपूर्ण वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए राजस्व के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक साबित हुआ है। पूरे साल का कुल जीएसटी राजस्व 8.3 प्रतिशत की कुल वृद्धि के साथ 22.27 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है। याद दिला दें कि अप्रैल 2025 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक ₹2.36 लाख करोड़ का मासिक कलेक्शन दर्ज किया था। पूरे साल की यह निरंतरता भारतीय बाजार की गहराई और उपभोक्ताओं के अटूट भरोसे को प्रदर्शित करती है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो जीएसटी कलेक्शन में महाराष्ट्र एक बार फिर सबसे आगे रहा है। अकेले महाराष्ट्र से लगभग 0.13 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों ने भी आंकड़ों को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश ने भी सराहनीय प्रदर्शन करते हुए नेट जीएसटी कलेक्शन में 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। बड़े राज्यों की यह सक्रियता देश की राजकोषीय स्थिति को और अधिक सशक्त बना रही है।
रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह का सीधा मतलब है कि सरकार के पास विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर और जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध होगा। डेलॉयट इंडिया के एम. एस. मणि जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े मजबूत ‘उपभोक्ता मांग’ (Consumer Demand) के प्रतीक हैं। हालांकि, ईवाई इंडिया के सौरभ अग्रवाल ने सचेत किया है कि भविष्य में वैश्विक चुनौतियों और महंगाई के कारण मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। फिलहाल, यह वृद्धि राजकोषीय घाटे को कम करने और देश की जीडीपी ग्रोथ को सहारा देने में मील का पत्थर साबित होगी।
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