Korba News
Korba News : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही की खबर सामने आई है। यहाँ के एक प्रसिद्ध जूस सेंटर में इस्तेमाल की जा रही बर्फ की सिली के भीतर एक मरा हुआ मेंढक मिलने से हड़कंप मच गया है। यह घटना शहर के व्यस्ततम इलाके घंटाघर चौपाटी की है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों लोग खान-पान के लिए उमड़ते हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, घंटाघर चौपाटी स्थित एक सोडा और गन्ना जूस की दुकान पर शुक्रवार शाम को रोज की तरह ग्राहकों की भीड़ थी। कुछ ग्राहकों ने जूस का ऑर्डर दिया, जिसके बाद संचालक जूस तैयार करने लगा। जूस को ठंडा करने के लिए जब संचालक ने बर्फ की सिली को तोड़ना शुरू किया, तो वह दंग रह गया। बर्फ के ठीक बीचों-बीच एक मरा हुआ मेंढक जमा हुआ था। मौके पर मौजूद ग्राहकों ने जैसे ही यह नजारा देखा, वहां अफरा-तफरी मच गई। लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी देखी गई कि जिस बर्फ का इस्तेमाल वे अपने पेय पदार्थों में कर रहे हैं, वह इतनी अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में बनाई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही चौपाटी संघ के अध्यक्ष रवि वर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने खुद बर्फ को और अधिक तोड़कर मेंढक को बाहर निकाला और पूरी घटना की जानकारी ली। रवि वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से मांग की है कि केवल दुकान संचालक ही नहीं, बल्कि उस बर्फ फैक्ट्री पर भी सख्त कार्रवाई की जाए जहाँ इस बर्फ का निर्माण हुआ है। हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी संबंधित दुकान का संचालन नियमित रूप से जारी है।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जूस सेंटर संचालक ने यह बर्फ निहारिका क्षेत्र के ‘धन्नु बर्फ डिपो’ से खरीदी थी। जब इस संबंध में डिपो संचालक डी. गुप्ता से पूछताछ की गई, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे शहर की विभिन्न फैक्ट्रियों से बर्फ थोक में खरीदते हैं। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि किस विशेष फैक्ट्री की बर्फ में मेंढक निकला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वह विवादित बर्फ उनके ही डिपो से गई थी या नहीं। यह बयान दर्शाता है कि बर्फ निर्माण और उसके वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्वच्छता मानकों का भारी अभाव है।
इस पूरे मामले पर खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी विकास भगत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि विभाग को इस घटना की आधिकारिक जानकारी मिल गई है और मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही एक विशेष टीम गठित की जाएगी जो कोरबा शहर की सभी बर्फ फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण करेगी। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि बर्फ बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता और वहां की साफ-सफाई मानकों के अनुरूप हो।
इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर मिलने वाले खान-पान की शुद्धता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि बर्फ में जमे हुए मृत जीव के बैक्टीरिया पूरे जूस में फैल सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड और हैजा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। कोरबा के नागरिकों ने नगर प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही दोबारा न हो। फिलहाल, पूरा शहर खाद्य विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
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