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Ration Card Cancelled: गुजरात में 5 साल में ‘चुपचाप’ रद्द हुए 6.34 लाख राशन कार्ड; उठे गंभीर सवाल

Ration Card Cancelled:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में राशन वितरण प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। पिछले पाँच वर्षों (2020 से अक्टूबर 2025 तक) में राज्य में 6.34 लाख से अधिक राशन कार्ड को ‘चुपचाप’ रद्द कर दिया गया है। लाभार्थियों की सूची में इस बड़े बदलाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में काफी शोर मचा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के पीछे वास्तविक और पारदर्शी वजहें क्या हैं, जिस पर अभी भी रहस्य बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रक्रिया पूरे सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक आवश्यक कदम है, या यह प्रशासनिक काम में गड़बड़ी का स्पष्ट संकेत है।

Ration Card Cancelled: पाँच वर्षों में राशन कार्ड रद्द होने का वर्षवार आँकड़ा

गुजरात में राशन कार्ड रद्द होने की संख्या साल-दर-साल चौंकाने वाली रही है। 2020 से अक्टूबर 2025 तक हटाए गए राशन कार्डों का वर्षवार ब्यौरा इस प्रकार है:

  • 2020: 47,936 कार्ड रद्द

  • 2021: 2,19,151 कार्ड रद्द

  • 2022: 1,32,362 कार्ड रद्द

  • 2023: 1,35,362 कार्ड रद्द

  • 2024: 30,889 कार्ड रद्द

  • अक्टूबर 2025 तक: 69,102 कार्ड रद्द

यह आँकड़ा, विशेष रूप से 2021 और 2022 में दो लाख से अधिक कार्डों का रद्द होना, लाभार्थियों की सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलाव को दर्शाता है। नाम हटने की वजहों पर स्पष्टता न होने के कारण विवाद और भी गहरा गया है।

Ration Card Cancelled: सरकार का दावा: दोहराव, अयोग्य लाभार्थी और तकनीकी त्रुटियाँ

इस विवाद पर सरकारी सूत्रों का दावा है कि ये कार्ड सिस्टम की सफाई के तहत हटाए गए हैं। सरकार के अनुसार, कार्ड रद्द करने की मुख्य वजहें निम्नलिखित थीं:

  • दोहराव (Duplication): कई नाम लिस्ट में एक से ज़्यादा बार थे।

  • अयोग्य उपभोक्ता: कई गैर-कानूनी या अयोग्य उपभोक्ता भी लिस्ट में शामिल थे।

  • आधार त्रुटि: कई लाभार्थियों के आधार कार्ड की जानकारी गलत थी।

  • मृत्यु और स्थानांतरण: मरे हुए और स्थानांतरित हुए उपभोक्ताओं के नाम भी हटा दिए गए हैं।

सरकारी सूत्रों का दावा है कि ये सभी नाम हटा दिए गए हैं ताकि वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं को ही योजना का लाभ मिल सके।

‘असली उपभोक्ता का नाम नहीं कटा’: सरकार का प्रतिदावा

सरकारी दावे के बावजूद, यह मुद्दा लगातार विवादों में घिरा हुआ है। हालांकि, सरकार का दृढ़ प्रतिदावा है कि किसी भी असली और पात्र उपभोक्ता का नाम गलती से नहीं हटाया गया है। सरकार ने यह भी दावा किया है कि जो नाम हटाए गए हैं, उनमें से किसी ने भी अब तक प्रशासन से संपर्क नहीं किया है और न ही इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज कराई है। सरकार के मुताबिक, यह चुप्पी उनके दावे को मजबूत करती है कि हटाए गए कार्ड या तो फर्जी थे या उनका उपयोग अब नहीं हो रहा था। दूसरी ओर, आलोचकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने का मतलब है कि कई गरीब परिवारों को बिना किसी सूचना के महत्वपूर्ण सरकारी सहायता से वंचित कर दिया गया है, और प्रशासन की तरफ से जाँच में और पारदर्शिता लाई जानी चाहिए।

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