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Goa Nightclub Owner: गोवा नाइट क्लब मालिक लूथरा ब्रदर्स को झटका, अग्रिम जमानत खारिज

Goa Nightclub Owner: दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने गोवा के बहुचर्चित ‘बिर्च बाय रोमियो’ नाइटक्लब में हुई आगजनी की घटना के संबंध में रेस्टोरेंट के मालिक गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला गोवा पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए मजबूत तर्कों और साक्ष्यों पर आधारित है, जिसने आरोपियों के घटना के बाद के आचरण और व्यवसाय से उनके सीधे जुड़ाव को उजागर किया। कोर्ट का यह कदम इस हाई-प्रोफाइल मामले में लूथरा बंधुओं की गिरफ्तारी की राह खोलता है, जो घटना के बाद से ही कथित तौर पर फ़रार चल रहे हैं।

Goa Nightclub Owner: गोवा पुलिस के वकील ने शुरू की जोरदार बहस

मामले की सुनवाई के दौरान, गोवा पुलिस की ओर से पेश हुए वकील अभिनव मुखर्जी ने अभियोजन पक्ष की बहस की शुरुआत की और आरोपियों द्वारा जांच से बचने के प्रयास को विस्तार से बताया। वकील मुखर्जी ने कोर्ट को बताया कि लूथरा भाइयों ने जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें नाइटक्लब के ‘ऑपरेशंस’ के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है और घटना के समय वे कथित तौर पर काम के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे। हालांकि, पुलिस के वकील ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह यात्रा आग लगने की घटना से ठीक पहले की थी, जो उनके बयान की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करती है।

Goa Nightclub Owner: लाइसेंस एग्रीमेंट ने खोली पोल

बहस के दौरान गोवा पुलिस ने कोर्ट के सामने लाइसेंस एग्रीमेंट प्रस्तुत किए, जिसने आरोपी भाइयों के दावों की हवा निकाल दी। वकील मुखर्जी ने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया कि लूथरा बंधुओं के पास नाइटक्लब को चलाने के लिए वैध लाइसेंस नहीं था। यह एक गंभीर उल्लंघन है, जो न केवल नाइटक्लब के संचालन की वैधता पर सवाल उठाता है, बल्कि आगजनी की घटना के लिए उनकी जिम्मेदारी को भी पुख्ता करता है, क्योंकि अवैध रूप से चल रहे प्रतिष्ठान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की संभावना अधिक होती है।

व्यापार से इनकार, फिर भी लाइसेंस में नाम

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पक्ष लगातार यह कह रहा है कि उनका बिजनेस से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम ही उनके इस दावे को झूठा साबित करता है। गोवा पुलिस ने कोर्ट को निम्नलिखित सबूत दिए:

  • FSSAI लाइसेंस: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) लाइसेंस के लिए सौरभ लूथरा ने ही आवेदन किया था।

  • पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PCB) लाइसेंस: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लाइसेंस के लिए भी आवेदनकर्ता सौरभ लूथरा ही थे।

  • GST लाइसेंस: वस्तु एवं सेवा कर (GST) लाइसेंस में भी पार्टनर्स की डिटेल्स में गौरव लूथरा, सौरभ लूथरा और अजय गुप्ता के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

  • पंचायत लाइसेंस: पुलिस ने यह भी बताया कि नाइटक्लब का पंचायत लाइसेंस पहले ही एक्सपायर हो चुका था और उसे रिन्यू नहीं किया गया था, जो संचालन की वैधता को और भी संदिग्ध बनाता है।

ये दस्तावेजी साक्ष्य स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि लूथरा बंधुओं का नाइटक्लब के व्यवसाय और उसके दैनिक संचालन से सीधा जुड़ाव था।

घटना के बाद तुरंत फ्लाइट बुक कर भागे

गोवा पुलिस के वकील ने लूथरा ब्रदर्स के आचरण को जाँच से बचने का स्पष्ट प्रयास करार दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आग लगने की घटना के तुरंत बाद, आरोपी भाइयों ने रात के 1:15 बजे ही फ्लाइट बुक कर ली थी। पुलिस ने तर्क दिया कि यह कदम उन्होंने जांच से बचने के लिए उठाया, न कि किसी वैध बिजनेस के काम से, जैसा कि उन्होंने दावा किया है। पुलिस के अनुसार, थाईलैंड में उनका कोई व्यावसायिक मसला नहीं था।

गिरफ्तारी से बचने की कोशिश और पुलिस एक्शन

जब पुलिस आरोपियों के घर पहुंची, तो उनकी मां और पत्नी ने जांच अधिकारियों को बताया कि उन्हें नहीं पता कि वे कहां हैं। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि उनके इस बर्ताव से यह साबित होता है कि वे जानबूझकर जांच और गिरफ्तारी से बचना चाहते थे। आरोपियों के फरार होने के बाद, पुलिस ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। कोर्ट में बताया गया कि उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए गए थे। इसके अलावा, उनकी आवाजाही को रोकने के लिए एक लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, 9 दिसंबर को एक ब्लू कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तलाश के लिए इंटरपोल को सक्रिय करता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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