SIR Voter List : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर भारतीय निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में काउंटर एफिडेविट दाखिल किया है। आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि याचिका एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने दावों की पुष्टि के लिए आयोग से संपर्क भी नहीं किया। आयोग ने याचिका को गलत धारणाओं पर आधारित बताते हुए खारिज करने की मांग की है।

SIR के तीनों आदेशों पर आयोग ने क्या कहा?
आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेश सर्वसम्मति से लिए गए फैसलों के आधार पर जारी किए गए। आयोग ने इन्हें संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित चुनाव कानूनों के अनुरूप बताया। हलफनामे में कहा गया कि अधिकारियों और निर्वाचन आयुक्तों की फाइलों पर टिप्पणियां अंतिम निर्णय नहीं होतीं। निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी लेता है।

28 जुलाई के आदेश को लेकर सामने आया विवाद
आयोग ने बताया कि आंतरिक कार्य आवंटन से जुड़ा 28 जुलाई 2026 का आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी ने जारी किया था। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे। इसके बाद 30 जुलाई के संयुक्त निर्देशों के मद्देनजर यह आदेश लागू नहीं किया गया।
फॉर्म-6 और SIR घोषणा पत्र अलग-अलग दस्तावेज
मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर आयोग ने कहा कि उसने फॉर्म में संशोधन नहीं किया है। इसके संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाला घोषणा पत्र अलग दस्तावेज है, जिससे मतदाता के पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है। आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन में दोनों की प्रस्तुति से फॉर्म-6 में बदलाव होने का भ्रम पैदा हो सकता था। 21 अक्टूबर 2026 के निर्णय के बाद इन्हें अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया।
अनमैप्ड मतदाताओं की सुनवाई पर नई व्यवस्था
आयोग के मुताबिक, पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाने वाले सभी मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। 26 सितंबर 2026 के निर्णय के तहत BLO घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) फैसला लेंगे। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और प्राथमिकता ऑनलाइन प्रक्रिया को दी जाएगी।

ECINet पोर्टल और मतदाता सूची पर स्पष्टीकरण
आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने का अधिकार ERO के पास है। पोर्टल पर बिना उनके आदेश के कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। ECINet की सुरक्षा और कानूनी अनुपालन की समीक्षा के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों वाली समिति बनाई गई है।
गोवा और पश्चिम बंगाल के मामलों पर जवाब
गोवा में कथित तौर पर छूटे 97 मतदाताओं के मामलों पर आयोग ने बताया कि 88 मामलों में फॉर्म-6 भरा जा चुका था। छह मामलों में फॉर्म नहीं भरा गया था, जबकि तीन लोगों के पास पुर्तगाली पासपोर्ट होने की जानकारी दी गई। पश्चिम बंगाल के मामलों में आयोग ने कहा कि संबंधित मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज हैं और उनके पक्ष में न्यायिक अधिकारियों के अनुकूल आदेश मौजूद हैं।
CEC को हटाने की मांग पर संवैधानिक दलील
आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। आयोग के अनुसार, उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग कानूनन सुनवाई योग्य नहीं है। उसने EVM से जुड़े पुराने आरोपों और SIR प्रक्रिया का भी बचाव किया।
विस्तृत जवाब दाखिल करने की मांगी अनुमति
दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और विस्तृत बिंदुवार हलफनामा देने की अनुमति मांगी है। उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु की ओर से दाखिल जवाब में आयोग ने अपने फैसलों और प्रक्रियाओं का बचाव किया है। अब इन दलीलों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।
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