Hantavirus Symptoms
Hantavirus Symptoms : हंता वायरस एक बेहद घातक और गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृंतकों (rodents) के जरिए इंसानों में फैलती है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में स्वास्थ्य विभाग इस वायरस को लेकर समय-समय पर अलर्ट जारी करता रहता है। डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस संक्रामक बीमारी से बचने के लिए लगातार दिशा-निर्देश साझा कर रहे हैं। यह वायरस धीरे-धीरे मानव शरीर पर हमला करता है और स्थिति बिगड़ने पर फेफड़ों से जुड़ी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने की सबसे ज्यादा आशंका किन लोगों को होती है और इससे खुद को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
गोरखपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन कंसलटेंट डॉ. विजय कुमार शर्मा के मुताबिक, यह वायरस उन जगहों पर अधिक सक्रिय होता है जहां लंबे समय से साफ-सफाई नहीं हुई हो। गोदामों, पुराने बेसमेंट, बंद पड़े कमरों, खेतों और कबाड़खानों (स्टोर रूम) जैसी जगहों पर चूहों का ठिकाना होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। जब इन स्थानों की सफाई की जाती है, तो संक्रमित धूल के कण हवा में तैरने लगते हैं और सांस के जरिए इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए किसान, सफाई कर्मचारी, निर्माण कार्यों में लगे मजदूर और गोदामों में काम करने वाले लोगों को इस संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। चूहों के मल-मूत्र, लार या उनके काटने से सीधे संपर्क में आने वाले लोग भी इसकी चपेट में आसानी से आ जाते हैं।
हंता वायरस के शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य फ्लू या मौसमी बुखार जैसे दिखाई देते हैं, जिस वजह से लोग अक्सर इसे हल्के में लेने की भूल कर बैठते हैं। संक्रमण की शुरुआत में मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना और पूरे शरीर की मांसपेशियों में असहनीय दर्द की शिकायत हो सकती है। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, मरीज को सांस लेने में गंभीर तकलीफ, सीने में तेज जकड़न, खांसी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी खतरनाक स्थितियां पैदा होने लगती हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों को पहचान कर डॉक्टरी सलाह न ली जाए, तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
इस खतरनाक वायरस से सुरक्षित रहने का सबसे पहला और प्रभावी नियम है चूहों की आबादी पर नियंत्रण पाना और स्वच्छता बनाए रखना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अपने घरों, दुकानों और आसपास के क्षेत्रों को पूरी तरह साफ रखें ताकि वहां चूहे अपना डेरा न बना सकें। जब भी किसी पुराने बंद कमरे, बेसमेंट या कबाड़खाने की सफाई करें, तो चेहरे पर उच्च गुणवत्ता वाला मास्क और हाथों में दस्ताने (gloaves) जरूर पहनें। एक बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि चूहों की गंदगी वाली जगह पर सूखी झाड़ू लगाने या सीधे धूल उड़ाने से बचें; क्योंकि इससे वायरस हवा में फैल जाता है। सफाई शुरू करने से पहले उस जगह पर ब्लीच या किसी प्रभावी कीटाणुनाशक (disinfectant) लिक्विड का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े और वायरस निष्क्रिय हो जाए। खान-पान की चीजों को हमेशा ढककर रखें ताकि चूहे उन्हें दूषित न कर सकें।
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