Hantavirus Symptoms
Hantavirus Symptoms : हाल के दिनों में दुनिया के कुछ हिस्सों में हंतावायरस के दोबारा उभरने की खबरों ने चिंता पैदा कर दी है। विशेष रूप से एक क्रूज शिप पर हुए आउटब्रेक के बाद इस वायरस को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे एक नया और कोविड जैसा बड़ा खतरा मान रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नया वायरस नहीं है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1993 से 2023 के बीच अमेरिका में हंतावायरस के 890 लैब-कन्फर्म मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यानी यह वायरस दशकों से अस्तित्व में है, बस समय-समय पर इसके नए क्लस्टर सामने आते रहते हैं।
भले ही हंतावायरस कोविड-19 की तरह बहुत तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इसकी मृत्यु दर (Mortality Rate) काफी अधिक है, जो इसे बेहद गंभीर बनाती है। सीडीसी के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हंतावायरस से संक्रमित होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 35 प्रतिशत की जान चली गई। इतनी उच्च मृत्यु दर के कारण ही डॉक्टर और वैज्ञानिक इस वायरस को लेकर बेहद सतर्क रहने की सलाह देते हैं। संक्रमण होने पर यह सीधे फेफड़ों और हृदय प्रणाली पर हमला करता है, जिससे मरीज की हालत बहुत जल्दी बिगड़ने लगती है।
हंतावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृतंकों (Rodents) में पाया जाता है। यह इंसानों में तब फैलता है जब वे चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह हवा के जरिए भी फैल सकता है; जब चूहों का मल सूखकर धूल में मिल जाता है और कोई व्यक्ति उस संक्रमित धूल में सांस लेता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। हालांकि, इंसानों से इंसानों में इसके फैलने के मामले दुर्लभ हैं, लेकिन इसके ‘एंडीज स्ट्रेन’ में ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन की संभावना बनी रहती है, जो विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है।
साल 2023 के बाद अब 2026 में इसके कुछ नए केस सामने आने से वैश्विक स्तर पर आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पष्ट किया है कि हंतावायरस के एक बड़े वैश्विक संकट या महामारी बनने की संभावना कम है। चूंकि इसका मानव-से-मानव संचरण (Human Transmission) बहुत सीमित है, इसलिए यह कोविड-19 की तरह पूरी दुनिया को चपेट में नहीं ले सकता। फिर भी, जिन इलाकों में चूहों का प्रकोप अधिक है, वहां स्थानीय स्तर पर यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती पेश कर सकता है।
हंतावायरस के शुरुआती लक्षण किसी सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे ही लगते हैं, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसके मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, कंपकंपी के साथ ठंड लगना, गंभीर सिरदर्द और मांसपेशियों में तेज दर्द शामिल है। इसके अलावा, मरीज को अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है। यदि संक्रमण गंभीर हो जाए, तो फेफड़ों में पानी भरने लगता है और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है। ऐसे में समय पर अस्पताल पहुंचना जान बचाने के लिए अनिवार्य है।
सीडीसी के डेटा के मुताबिक, इस वायरस का असर पुरुषों में अधिक देखा गया है। कुल संक्रमितों में 60 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं पाई गई हैं। संक्रमित होने वाले व्यक्तियों की औसत उम्र 35 वर्ष के आसपास देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग खेती, निर्माण कार्य या सफाई जैसे कामों से जुड़े हैं, जहां चूहों के संपर्क में आने की आशंका ज्यादा रहती है, उन्हें खतरा अधिक है। साथ ही, पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह वायरस अधिक घातक साबित होता है।
हंतावायरस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका अपने आसपास के वातावरण को चूहों से मुक्त रखना है। घर के कोनों, स्टोर रूम और बंद पड़ी जगहों की सफाई करते समय हमेशा मास्क और दस्ताने पहनें। चूहों के मल या मूत्र को सीधे झाड़ू से साफ करने के बजाय कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल हवा में न उड़े। अपने भोजन और पीने के पानी को हमेशा ढककर रखें और घर में चूहों के प्रवेश द्वारों को बंद कर दें। जागरूकता और थोड़ी सी सावधानी इस जानलेवा वायरस को दूर रखने में कारगर साबित हो सकती है।
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