Solar Eclipse India 2026 : विज्ञान और अध्यात्म दोनों ही दृष्टियों से सूर्य और चंद्र ग्रहण को एक बेहद महत्वपूर्ण और विशेष घटना माना जाता है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों और वैज्ञानिकों के लिए यह समय शोध और अध्ययन के लिहाज से बहुत अनूठा होता है। विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार, जब चंद्रमा चक्कर काटते हुए पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को रोक लेता है।

इस वजह से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है और इसी स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। खगोलीय नियमों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण हमेशा केवल अमावस्या तिथि पर ही घटित होता है। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन मास की अमावस्या पर लगा था और अब एक बार फिर अंतरिक्ष में सूर्य ग्रहण की बड़ी घटना होने जा रही है, जिससे प्रभावित इलाकों में दिन के समय ही पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा।

हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण
यह खगोलीय घटना साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण होगी। सूर्य को यह ग्रहण सावन महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को लगने जा रहा है, जिसे सनातन परंपरा में ‘हरियाली अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। इस बार यह ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। वहीं, अगर पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं की बात करें, तो राहु और केतु को पाप ग्रह माना गया है। जब ये दोनों ग्रह सूर्य को अपने ग्रास में लेने यानी निगलने की कोशिश करते हैं, तब पृथ्वी पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव दिखाई देता है। साल 2026 का यह अंतिम सूर्य ग्रहण कुल 7 घंटे की लंबी अवधि तक चलेगा, जिसके कारण सूर्य पर राहु और केतु का नकारात्मक प्रभाव 7 घंटे से भी अधिक समय तक बना रहेगा।
भारतीय समयानुसार जानें साल के अंतिम सूर्य ग्रहण का सटीक समय
आगामी 12 अगस्त को लगने वाले साल के इस अंतिम सूर्य ग्रहण का समय काफी लंबा रहने वाला है। भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू हो जाएगा। इसके बाद इस खगोलीय घटना का समापन अथवा मोक्ष काल अगले दिन यानी 13 अगस्त, गुरुवार को तड़के सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। रात के समय शुरू होने के कारण इस ग्रहण की अवधि के दौरान भारत में दृश्यता शून्य रहेगी।
कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में बनेगा दुर्लभ चतुर्ग्रही योग
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। जिस समय सूर्य को यह ग्रहण लगेगा, उस समय कर्क राशि में एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत ज्योतिषीय संयोग बनेगा। इस दौरान कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु (बृहस्पति) एक साथ गोचर करते हुए विराजमान रहेंगे। चार बड़े ग्रहों की इस युति के कारण यह सूर्य ग्रहण ‘चतुर्ग्रही योग’ के साए में लगेगा। कर्क राशि में सूर्य और चंद्रमा बिल्कुल समान अंशों (डिग्री) पर रहकर गुरु और बुध के साथ संबंध बनाएंगे, जिसका ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देश-दुनिया पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
भारत में रात होने के कारण इन विदेशी देशों में ही दिखाई देगा ग्रहण
चूंकि जिस समय अंतरिक्ष में सूर्य को ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात का समय हो रहा होगा। सूर्य की अनुपस्थिति के कारण साल का यह अंतिम सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इस अद्भुत नजारे को यूरोप के कई प्रमुख देशों, अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों और रूस के कुछ उत्तरी व पूर्वी भागों में बेहद स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। इन प्रभावित क्षेत्रों में ग्रहण के पूर्ण प्रभाव के दौरान दिन में ही रात जैसा नजारा देखने को मिल सकता है।
सूतक काल के नियम और भारत में इसकी मान्यता को लेकर संशय दूर
हिंदू धर्म और शास्त्रों में ग्रहण की घटना को शुभ नहीं माना जाता है और इसे एक सूतक काल से जोड़ा जाता है। धार्मिक नियमों के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले ही सूतक काल का प्रारंभ हो जाता है। सूतक के समय को अशुद्ध और नकारात्मक माना जाता है, इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। सूतक काल ग्रहण के मोक्ष (समाप्त) होने तक जारी रहता है।
हालांकि, शास्त्रों का यह भी नियम है कि सूतक काल केवल उसी स्थान पर मान्य होता है जहां ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में बिल्कुल भी नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां इसका कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा और लोग सामान्य रूप से अपनी पूजा-पाठ कर सकेंगे।
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