Hezbollah US Sanctions : अमेरिकी प्रशासन ने लेबनान स्थित हिज्बुल्ला के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इसके साथ ही संगठन को ईरान के प्रॉक्सी के रूप में फिर से सूचीबद्ध किया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका इजराइल और लेबनान के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी कार्रवाई से हिज्बुल्ला के वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
दस लोगों पर भी लगाए गए प्रतिबंध
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग ने हिज्बुल्ला से जुड़े कथित वित्तीय नेटवर्क के 10 लोगों पर भी प्रतिबंध लगाया है। इन लोगों पर संगठन तक बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई देशों में सक्रिय था और अलग-अलग माध्यमों से धन को हिज्बुल्ला तक पहुंचाने का काम करता था।
चार देशों के बीच चलता था कथित कैश नेटवर्क
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, प्रतिबंधित नेटवर्क में ऐसे कूरियर शामिल थे, जो लेबनान, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच व्यावसायिक विमान सेवाओं के जरिए यात्रा करते थे। आरोप है कि ये लोग अलग-अलग देशों के बीच बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाते थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए हिज्बुल्ला को पारंपरिक वित्तीय प्रणाली से बाहर विदेशी मुद्रा हासिल करने में मदद मिलती थी।
प्रतिबंधों से बचने में मिलती थी मदद
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि कथित कैश ट्रांसफर नेटवर्क ने हिज्बुल्ला को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों से बचने का रास्ता उपलब्ध कराया। अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों डॉलर तक की रकम अलग-अलग देशों में पहुंचाई जाती थी। अमेरिका का आरोप है कि ऐसी गतिविधियां संगठन की वित्तीय क्षमता को बनाए रखने में मदद करती हैं और उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करती हैं।
हिज्बुल्ला को लेकर अमेरिका ने बदला निर्धारण
अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, हिज्बुल्ला को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स यानी IRGC-QF के लिए काम करने वाले संगठन के रूप में फिर से निर्धारित करने का उद्देश्य उसकी कथित भूमिका को स्पष्ट करना है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि हिज्बुल्ला को पूरी तरह स्वतंत्र संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
IRGC-QF से संबंध का अमेरिकी दावा
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, हिज्बुल्ला की सैन्य गतिविधियां, बाहरी सुरक्षा अभियान और प्रमुख वित्तीय नेटवर्क ईरान की IRGC-QF की व्यापक गतिविधियों के विस्तार के तौर पर काम करते हैं। अमेरिका का दावा है कि IRGC-QF ईरान की सीमाओं के बाहर अपनी गतिविधियों को संचालित करने का प्रमुख माध्यम है। अमेरिकी प्रशासन ने इसी आधार पर हिज्बुल्ला की भूमिका को लेकर नया निर्धारण किया है।
हिज्बुल्ला की दोहरी भूमिका पर जोर
हिज्बुल्ला लेबनान में राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ा संगठन है और उसके पास सशस्त्र विंग भी है। अमेरिका लंबे समय से हिज्बुल्ला और IRGC-QF दोनों को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी संगठनों की सूची में रखता आया है। नए कदम के बाद संगठन से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर अमेरिकी निगरानी और सख्त हो सकती है।
इजराइल-लेबनान शांति प्रयासों के बीच कार्रवाई
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन इजराइल और लेबनान के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। ऐसे में हिज्बुल्ला पर नए प्रतिबंधों को क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका की कोशिश एक ओर वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बनाने और दूसरी ओर क्षेत्र में चल रही राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले संगठनों पर निगरानी बढ़ाने की है।
प्रतिबंधों के बाद बढ़ सकता है दबाव
नए प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका ने हिज्बुल्ला के कथित वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया है। खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा और नकदी हस्तांतरण के जरिए धन पहुंचाने के आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई है। आने वाले समय में इन प्रतिबंधों का असर संगठन से जुड़े वित्तीय लेन-देन, सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर देखने को मिल सकता है। यह कदम अमेरिका और हिज्बुल्ला के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को भी नए स्तर पर ले जा सकता है।
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