Hypertension Tips
Hypertension Tips : वैश्विक स्तर पर हर साल ‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे’ यानी विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के प्रति सचेत और जागरूक करना है. चिकित्सा विज्ञान में हाइपरटेंशन को एक बेहद खतरनाक ‘साइलेंट किलर’ (खामोश हत्यारा) का दर्जा दिया गया है. इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि यह बीमारी लंबे समय तक मानव शरीर में बिना किसी स्पष्ट या बाहरी लक्षण के पनपती रहती है और अंदर ही अंदर अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है. अधिकांश मरीजों को इस बात का भान तब तक नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर असामान्य रूप से बढ़ा हुआ है, जब तक कि उन्हें दिल का दौरा, ब्रेन हैमरेज या किडनी फेलियर जैसी कोई जानलेवा और आपातकालीन स्वास्थ्य समस्या का सामना न करना पड़े. यही वजह है कि नियमित जांच को इस बीमारी से बचने का एकमात्र अचूक हथियार माना जाता है.
आधुनिक समय में हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या और आदतों ने इस बीमारी को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया है. अत्यधिक मानसिक तनाव, जंक फूड और प्रोसेस्ड आहार का बढ़ता चलन, शारीरिक निष्क्रियता, बढ़ता मोटापा, धूम्रपान की लत और देर रात तक जागने के कारण नींद की कमी जैसी खराब आदतें हाई बीपी के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर रही हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो बीमारी पहले केवल ढलती उम्र या बुजुर्गों की समस्या मानी जाती थी, वह अब तेजी से युवाओं और कामकाजी वयस्कों को अपना शिकार बना रही है. काम के बढ़ते दबाव और असंतुलित जीवनशैली के कारण 25 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित उछाल देखा जा रहा है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में लगभग 1.4 अरब लोग इस समय हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं. इस आंकड़े का सबसे डरावना पहलू यह है कि इनमें से करीब 44 प्रतिशत लोगों को इस बात की भनक तक नहीं है कि वे हाइपरटेंशन के मरीज बन चुके हैं. अगर भारत के संदर्भ में बात करें, तो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 21.3 प्रतिशत महिलाएं और 24 प्रतिशत पुरुष हाई बीपी से ग्रसित हैं. यदि इस समस्या को शुरुआती दौर में ही न पहचाना जाए, तो यह रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है, जिससे स्ट्रोक और क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी लाइलाज बीमारियां होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञों ने इस विषय पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. डॉ. पुरुषोत्तम लाल के मुताबिक, युवाओं में बढ़ता मोटापा और शारीरिक एक्टिविटी की कमी इस बीमारी का मुख्य ईंधन है. वहीं, डॉ. आर. एस. वेंकटेसुलु का मानना है कि न केवल अस्पतालों में, बल्कि अब परिवारों और कार्यस्थलों (ऑफिस) पर भी नियमित बीपी मॉनिटरिंग को एक अनिवार्य स्वास्थ्य संस्कृति के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. डॉ. अभिनव श्रीवास्तव के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को अपनी सेहत से जुड़ी बुनियादी जानकारियों की तरह ही अपना सटीक बीपी नंबर भी हमेशा जुबानी याद होना चाहिए. डॉक्टरों का सामूहिक मत है कि केवल लक्षणों के प्रकट होने का इंतजार करना एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है.
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव अग्रवाल के अनुसार, हाइपरटेंशन को पूरी तरह नियंत्रित रखने के लिए नियमित जांच, डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं का बिना नागा पालन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे ज्यादा जरूरी है. अपने दैनिक भोजन में साधारण नमक (सोडियम) की मात्रा को तुरंत सीमित करें, पैकेज्ड व प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूरी बनाएं और आहार में ताजे मौसमी फल व हरी सब्जियों को प्रमुखता से शामिल करें. इसके साथ ही, रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज वॉक (पैदल चलना), योग या मनपसंद व्यायाम करें. अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखें, 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें, तंबाकू और शराब के अत्यधिक सेवन से पूरी तरह परहेज करें. घर पर एक डिजिटल बीपी मॉनिटरिंग मशीन रखना और समय-समय पर डॉक्टर से फॉलोअप लेना इस बीमारी को हराने का सबसे सरल मार्ग है.
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