छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Birthday Controversy: स्वास्थ्य मंत्री के सचिव के जश्न पर हाईकोर्ट नाराज़, कानून व्यवस्था पर उठा सवाल

Chhattisgarh Birthday Controversy: छत्तीसगढ़ में एक वायरल वीडियो ने राज्य की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निजी सचिव राजेंद्र दास ने अपनी पत्नी का जन्मदिन सड़क पर धूमधाम से मनाते हुए, लग्जरी कार की बोनट पर केक काटा और आतिशबाजी की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट की निगरानी तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, दी कड़ी फटकार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र प्रसाद की खंडपीठ ने इस घटना पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और स्वास्थ्य मंत्री को स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं।

मंत्री बोले – “कानून से बड़ा कोई नहीं”

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा “कानून सबके लिए बराबर है। अगर मेरे निजी सचिव ने गलती की है, तो कार्रवाई जरूर होगी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, गिरफ्तारी हुई है और वाहन भी जब्त कर लिया गया है।”हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “यह कोई गंभीर अपराध नहीं था, बल्कि जन्मदिन के उत्साह में हुई गलती थी।” मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राजेंद्र दास अपने पद पर बने रहेंगे।उन्होंने कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस का पलटवार – “कानून सिर्फ आम जनता के लिए?”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि मंत्री के बयान परस्पर विरोधाभासी हैं। उन्होंने पूछा “जब वीडियो पहले दिन वायरल हुआ, तो तीन दिन तक पुलिस निष्क्रिय क्यों रही? अज्ञात के खिलाफ मामला क्यों दर्ज हुआ?”श्रीवास्तव ने दावा किया कि हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद ही पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज की और गिरफ्तारी की। अब इस मामले में चिरमिरी थाना प्रभारी को भी कोर्ट में तलब किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में कानून व्यवस्था चरमराई हुई है और बीजेपी कार्यकर्ताओं के लिए कानून का कोई डर नहीं रह गया है।यह पूरा प्रकरण छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब यह देखना होगा कि क्या सरकार अपने ही अधिकारियों के खिलाफ दृढ़ता से कार्रवाई करती है, या मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है।

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