Himalayan Earthquake : नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच चुकी है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। मलबे में दबे लोगों के शवों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ स्निफर डॉग की भी मदद ले रही हैं।
सुरक्षित बचे मकानों में लौटने लगे लोग
भीषण सैलाब के बाद जिन इलाकों में कुछ मकान पूरी तरह सुरक्षित या कम क्षतिग्रस्त बचे हैं, वहां लोगों ने धीरे-धीरे वापस लौटना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोग अपने घरों की सफाई में जुटे हैं और बाढ़ के पानी से खराब हुए सामान को बाहर निकाल रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में तबाही इतनी व्यापक है कि बड़ी संख्या में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और वहां लौटना अभी संभव नहीं है।
लांगटांग सुरंग में रेस्क्यू अभियान तेज
बाढ़ के बीच लांगटांग सुरंग भी राहत एवं बचाव अभियान का बड़ा केंद्र बनी हुई है। इस सुरंग में कई मजदूरों के फंसे होने की खबर सामने आई थी। जानकारी के अनुसार, भारत और नेपाल की संयुक्त रेस्क्यू टीमें सुरंग के अंदर करीब 185 मीटर तक पहुंच चुकी हैं। बचाव दल सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने और उनकी सुरक्षित निकासी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
अगस्त में हिमालयी क्षेत्र में आए 130 से ज्यादा भूकंप
इस प्राकृतिक आपदा के बीच राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी NCS की एक रिपोर्ट ने नई चिंता पैदा कर दी है। NCS के मुताबिक, अगस्त महीने में हिमालयी क्षेत्र और उससे जुड़े हिंदुकुश-पामीर इलाके में 130 से अधिक भूकंप की घटनाएं दर्ज की गईं। भूकंप विज्ञान केंद्र देश में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करने के साथ इससे संबंधित वैज्ञानिक अध्ययन भी करता है।
भारत के हिमालयी क्षेत्र में सबसे ज्यादा झटके
NCS की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में सबसे ज्यादा 63 भूकंप भारत के हिमालयी क्षेत्र में दर्ज किए गए। वहीं लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कुल 36 भूकंपीय घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। इसके अलावा अफगानिस्तान में 26 और नेपाल में 10 भूकंप के झटके दर्ज किए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि पूरे हिमालयी बेल्ट में अगस्त के दौरान भूकंपीय गतिविधियां लगातार बनी रहीं।
ज्यादातर भूकंप कम तीव्रता वाले रहे
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में दर्ज किए गए ज्यादातर भूकंप कम तीव्रता वाले थे। हालांकि, कुछ झटके अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत भी रहे। 13 अगस्त को लद्दाख में 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसी दिन 4.3 तीव्रता का एक और भूकंप भी महसूस किया गया। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं।
क्या लगातार भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत हैं?
अगस्त में इतने अधिक भूकंप दर्ज होने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये घटनाएं भविष्य में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का संकेत हैं। हालांकि, केवल भूकंपों की संख्या के आधार पर किसी बड़े भूकंप या आपदा की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। विशेषज्ञ आमतौर पर भूकंप की तीव्रता, गहराई, स्थान और समय के पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं।
नेपाल की तबाही ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही और उसी अवधि में हिमालयी क्षेत्र में दर्ज भूकंपीय गतिविधियों ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। हालांकि, इन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी होंगे। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को बचाना, लापता लोगों की तलाश करना और विस्थापित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना है।
राहत और पुनर्वास के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद नेपाल के सामने अब राहत के साथ-साथ पुनर्वास की भी बड़ी चुनौती है। हजारों लोगों के लापता होने और बड़ी संख्या में घरों के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी है। वहीं, लगातार बदलते मौसम और पहाड़ी इलाकों में संभावित भूस्खलन जैसी चुनौतियां बचाव अभियान को और मुश्किल बना सकती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के साथ भारत और अन्य राहत एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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