Assam CM Oath
Assam CM Oath : असम विधानसभा चुनाव 2026 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद आज राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने आज असम के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। सरमा की इस ताजपोशी के साथ ही असम में सत्ता की कमान अब एक ऐसे नेतृत्व के हाथ में आ गई है, जिसे पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा रणनीतिकार माना जाता है। विधानसभा चुनावों में एनडीए को मिली भारी बढ़त ने यह साफ कर दिया था कि जनता ने विकास और स्थिरता के नाम पर एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताया है।
दिसपुर के इस महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में भारतीय राजनीति के कई बड़े दिग्गजों ने शिरकत की। शपथ ग्रहण समारोह की गरिमा बढ़ाने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे गुवाहाटी शहर को उत्सव की तरह सजाया गया था। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार के लिए असम और पूर्वोत्तर का क्षेत्र सामरिक और राजनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ लेने के तुरंत बाद, मंत्रिमंडल के चार अन्य महत्वपूर्ण चेहरों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इन नामों में क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन के साथियों का पूरा ख्याल रखा गया है:
रामेश्वर तेली: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे रामेश्वर तेली को राज्य मंत्रिमंडल में जगह देकर उनके अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश की गई है।
अजंता नियोग: बीजेपी विधायक अजंता नियोग ने भी मंत्री पद की शपथ ली; वह क्षेत्र की राजनीति में एक प्रभावी महिला चेहरा मानी जाती हैं।
अतुल बोरा: असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष अतुल बोरा ने भी शपथ ली, जो गठबंधन की मजबूती का प्रतीक है।
चरण बोरो: बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेता चरण बोरो को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है, जिससे बोडोलैंड क्षेत्र की आकांक्षाओं को प्रतिनिधित्व मिला है।
असम चुनाव के परिणाम उम्मीद के मुताबिक ही रहे, जहाँ विपक्ष के तमाम गठबंधन एनडीए के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहे। हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव प्रचार के दौरान विकास, घुसपैठ पर लगाम और असमिया संस्कृति के संरक्षण को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था। जनता ने उनके इस विजन को स्वीकार किया और भारी बहुमत से सत्ता की चाबी सौंपी। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि सरमा की जमीनी पकड़ और प्रशासनिक दक्षता ने ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया है। अब उनके सामने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और चुनावी वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी।
शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता क्या होगी। माना जा रहा है कि रोजगार सृजन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बुनियादी ढांचे का विकास सरमा सरकार के मुख्य लक्ष्य होंगे। इसके अलावा, राज्य में लंबे समय से चल रहे नागरिकता और सीमा संबंधी मुद्दों पर भी सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। हिमंता बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलते हुए असम के हर वर्ग के उत्थान के लिए काम करेगी। आज का दिन असम के इतिहास में एक नई उम्मीद और जोश के रूप में दर्ज हो गया है।
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