छत्तीसगढ़

Gariaband Naxals Surrender: ऐतिहासिक सफलता! गरियाबंद में नक्सली ‘खत्म’, सभी सक्रिय माओवादियों ने किया सरेंडर

Gariaband Naxals Surrender: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से नक्सल विरोधी मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। उदंती एरिया कमेटी में सक्रिय 7 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 4 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से दो नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। रायपुर में आईजी अमरेश मिश्रा की मौजूदगी में नक्सलियों ने अपने हथियार पुलिस के हवाले किए।

सूत्रों के अनुसार, गरियाबंद-धमतरी-नुवापाड़ा डिविजन की उदंती एरिया कमेटी के ये सभी नक्सली रायपुर पुलिस लाइन में आत्मसमर्पण के लिए पहुंचे। इस दौरान कुल 6 हथियार बरामद हुए, जिनमें एक SLR, तीन INSAS रायफल और एक सिंगल शॉट हथियार शामिल हैं। आईजी अमरेश मिश्रा ने इसे नक्सल क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम बताया।

इनामी नक्सलियों की पहचान

सरेंडर करने वालों में एरिया कमांडर सुनील और सचिव एरिना शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा लुद्रों, विद्या, नंदिनी और मलेश पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था, जबकि कांती पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

जानकारी के अनुसार, नक्सली कमांडर सुनील ने संगठन के भीतर शांति की अपील करते हुए अपने साथियों को आत्मसमर्पण का आह्वान किया। इसके बाद बाकी 6 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। सुरक्षा बलों ने इसे नक्सल मोर्चे पर बेहद सकारात्मक कदम करार दिया है।

आईजी ने की पुलिस टीम की सराहना

आईजी अमरेश मिश्रा ने गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा की कार्यशैली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एसपी और उनकी टीम की रणनीति और लगातार प्रयासों से यह बड़ी सफलता संभव हो पाई। मिश्रा ने कहा कि इस आत्मसमर्पण से उदंती एरिया कमेटी लगभग समाप्त हो गई है, जिससे नक्सलियों की ताकत को भारी झटका लगा है।

2010 से सक्रिय थे नक्सली

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली 2010 से सक्रिय थे और कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे। इनके सरेंडर के बाद नक्सल संगठन को इस क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों का कहना है कि अब उदंती एरिया कमेटी का प्रभाव लगभग खत्म हो गया है और इससे विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सरेंडर किए गए नक्सलियों की संख्या और हथियारों की बरामदगी पुलिस के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है। यह घटना छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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