Hormuz Missile Attack: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाज एमटी स्काईलाइट पर हुए घातक मिसाइल हमले के बाद से लापता भारतीय कैप्टन आशीष कुमार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 1 मार्च को हुए इस हमले के बाद कैप्टन का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से उनकी मौजूदा स्थिति और संभावित लोकेशन का पता लगाने के लिए ठोस प्रयास करने को कहा है।
CJI सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को कैप्टन आशीष कुमार के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने का निर्देश दिया। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि संबंधित एजेंसियों और सरकार से जानकारी लेकर कैप्टन की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को भरोसा दिलाया कि मामले की जानकारी जुटाकर निर्धारित समयसीमा में जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।
पहले मृत मान लिया गया था कैप्टन को
हमले के बाद जहाज के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के दौरान कैप्टन आशीष के केबिन से जली हुई हड्डियां बरामद हुई थीं। शुरुआती जांच में इन अवशेषों को कैप्टन का मानते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। परिवार को भी इसी आधार पर जानकारी दी गई थी। लेकिन बाद में सामने आई डीएनए जांच ने पूरे मामले को एक अलग दिशा दे दी।
डीएनए जांच से सामने आया बड़ा सवाल
बाद में कराई गई डीएनए जांच में यह पुष्टि नहीं हुई कि जहाज से मिले अवशेष कैप्टन आशीष कुमार के थे। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उनके परिवार के लिए यह संभावना पैदा हुई कि कैप्टन शायद जीवित हो सकते हैं। इसी आधार पर उनकी पत्नी अंशु कुमारी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सरकार से उनके पति की तलाश के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
फिरौती की कॉल ने बढ़ाया रहस्य
अंशु कुमारी की याचिका के मुताबिक, हमले के करीब तीन दिन बाद 4 मार्च को उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन आए। इनमें यूएई और पाकिस्तान से जुड़े नंबर भी बताए गए हैं। याचिका में दावा किया गया कि फोन करने वालों ने कैप्टन की रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी। इन कॉल्स ने परिवार के संदेह को और मजबूत कर दिया कि कैप्टन को संभवतः किसी ने बंधक बनाया हो सकता है।
जहाज नष्ट होने के बाद भी WhatsApp पर गतिविधि
याचिका में एक और महत्वपूर्ण दावा किया गया है। अंशु कुमारी के अनुसार, जहाज के तबाह होने के कई घंटे बाद तक कैप्टन आशीष के फोन पर भेजे गए WhatsApp संदेश डिलीवर होते रहे। इसके अलावा 31 मार्च को उनका WhatsApp प्रोफाइल कथित तौर पर मैन्युअली डिलीट किया गया। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने कैप्टन के फोन का इस्तेमाल किया था।
पत्नी ने सरकार पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाया
कैप्टन की पत्नी ने केंद्र सरकार पर मामले की जांच में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि जीवन और संभावित बंधक बनाए जाने के संकेत मिलने के बावजूद लापता भारतीय नागरिक की तलाश के लिए विशेष जांच शुरू नहीं की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया गया।
अब केंद्र के जवाब पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों की जांच पर नजर रहेगी। अदालत यह जानना चाहती है कि कैप्टन आशीष कुमार की वास्तविक स्थिति क्या है और उनकी तलाश के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। सरकार की स्टेटस रिपोर्ट इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि जांच से इस रहस्य का जल्द खुलासा होगा और कैप्टन के बारे में सच्चाई सामने आएगी।
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