Hormuz Strait Crisis: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध अब अपने 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति पल-पल भयावह होती जा रही है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान की सीमाओं के भीतर की जा रही एयर स्ट्राइक के जवाब में ईरान भी अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों के साथ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। अब यह संघर्ष जमीन और आसमान से निकलकर समुद्र की लहरों तक पहुंच गया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लग गई है।
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने दावा किया है कि उसने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी एक आधिकारिक वीडियो में ईरानी जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने समुद्र में माइन्स बिछाने वाली ईरान की 10 से अधिक नावों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। अमेरिका का उद्देश्य इस मार्ग को सुरक्षित करना है ताकि वैश्विक व्यापारिक जहाज बिना किसी बाधा के गुजर सकें।
जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन्स (समुद्री सुरंगें) बिछाने की पुष्टि की है। ईरानी कमांडरों का दावा है कि उनके पास लगभग 6,000 माइन्स का भंडार है, जिन्हें इस संकरे समुद्री मार्ग पर तैनात किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कई माइन्स अत्याधुनिक सेंसर्स से लैस हैं, जिन्हें ढूंढना और नष्ट करना बेहद कठिन है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी दुश्मन देश के जहाज को यहाँ से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान द्वारा जारी किए गए एक अन्य वीडियो में एक साथ दर्जनों मिसाइलों को आसमान की ओर बढ़ते देखा जा सकता है, जो उनकी सैन्य तैयारी का प्रदर्शन है।
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी माइन्स फौरन नहीं हटाईं, तो उसे इसके “भयानक अंजाम” भुगतने होंगे। ट्रंप प्रशासन इस समय दोतरफा दबाव में है; एक तरफ उसे सैन्य मोर्चे पर ईरान को रोकना है, तो दूसरी तरफ घरेलू और वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट का समाधान खोजना है। युद्ध की भीषणता ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को भी हाशिए पर धकेल दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने या बाधित होने का सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। इसी बीच, अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी कुछ भ्रम की स्थिति देखी गई। पहले दावा किया गया कि अमेरिकी नेवी ने एक जहाज को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है, लेकिन बाद में एनर्जी सेक्रेटरी ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया और प्रशासन को इस पर सफाई देनी पड़ी। यह असमंजस दर्शाता है कि जमीनी हालात कितने अस्थिर हैं। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
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