Balendra Shah Victory
Balendra Shah Victory: नेपाल के संसदीय इतिहास में शनिवार को एक ऐसा अध्याय लिखा गया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ‘बलेन’ के नाम से मशहूर 35 वर्षीय रैपर बालेंद्र शाह ने नेपाल के चार बार प्रधानमंत्री रह चुके दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली को उनके ही गढ़ में हराकर सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया है। झापा-5 सीट पर हुए इस मुकाबले में युवा ऊर्जा ने दशकों पुराने राजनीतिक अनुभव को पछाड़ दिया। यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि नेपाल की बदलती राजनीतिक चेतना का प्रतीक मानी जा रही है।
74 वर्षीय मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली अपनी पारंपरिक सीट झापा-5 से चुनाव हार गए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बालेंद्र शाह ने ओली को 49,614 मतों के भारी अंतर से पराजित किया। शाह को कुल 68,348 वोट मिले, जबकि अनुभवी नेता ओली महज 18,734 वोटों पर सिमट कर रह गए। काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा देकर सीधे प्रधानमंत्री स्तर के नेता को चुनौती देना बालेंद्र के लिए एक बड़ा जुआ था, जो अब एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है।
नेपाल में यह चुनाव सितंबर 2025 में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुआ था। उस समय जेन-जी (Gen-Z) युवाओं के नेतृत्व में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन देखते ही देखते भ्रष्टाचार और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक जन-आंदोलन बन गया था। उन हिंसक प्रदर्शनों में 77 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद तत्कालीन ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। बालेंद्र शाह की यह जीत उसी आक्रोश और बदलाव की इच्छा का परिणाम है, जिसने पुरानी व्यवस्था को उखाड़ फेंका।
1990 में काठमांडू में जन्मे बालेंद्र शाह की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर प्रशिक्षण लिया, लेकिन उन्हें असली पहचान मिली नेपाल के अंडरग्राउंड ‘हिप-हॉप’ संगीत से। माओवादी गृहयुद्ध के साये में बड़े हुए शाह ने अपने गीतों के जरिए भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता पर कड़े प्रहार किए। उनके गानों ने युवाओं के भीतर एक नई राजनीतिक समझ पैदा की। मेयर के रूप में काठमांडू में किए गए उनके कार्यों ने जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया।
निर्वाचन आयोग के शुरुआती रुझान बताते हैं कि बालेंद्र शाह की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में बहुमत की ओर बढ़ रही है। यदि उनकी पार्टी मैजिक फिगर हासिल कर लेती है, तो 35 साल की उम्र में बालेंद्र शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यह हाल की नेपाली राजनीति का सबसे नाटकीय और क्रांतिकारी मोड़ है, जहाँ एक मध्यमार्गी (Centralist) विचारधारा वाली नई पार्टी ने स्थापित कम्युनिस्ट और कांग्रेस दलों के वर्चस्व को हिला दिया है।
बालेंद्र शाह ने इस चुनाव में अपना पूरा राजनीतिक करियर दांव पर लगा दिया था। जानकारों का मानना है कि उनकी जीत नेपाल में ‘पुराने गार्ड्स’ बनाम ‘नई पीढ़ी’ की लड़ाई का परिणाम है। 74 साल के नेता को उनके ही घर में जाकर मात देना यह दिखाता है कि नेपाल की जनता अब नारों के बजाय काम और पारदर्शिता चाहती है। यदि शाह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह दक्षिण एशिया में युवाओं के नेतृत्व वाली सरकार का एक नया उदाहरण होगा।
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