मध्य प्रदेश

IAS Santosh Verma: IAS संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ीं, MP सरकार ने केंद्र को भेजा बर्खास्तगी प्रस्ताव

IAS Santosh Verma: मध्य प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के प्रदेश अध्यक्ष और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी संतोष वर्मा को ‘मर्यादाविहीन’ टिप्पणी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बृहस्पतिवार को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर संतोष वर्मा को उनकी सेवाओं से बर्खास्त करने की सिफारिश की है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस सिफारिश के साथ ही राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने वर्मा को उनके वर्तमान पद, यानी कृषि विभाग के उप सचिव, से तत्काल हटा दिया है। उन्हें अब बिना किसी विभाग और बिना किसी कार्य के जीएडी से ‘अटैच’ कर दिया गया है। यह कार्रवाई वर्मा द्वारा दिए गए एक विवादित बयान के बाद हुई है, जिसने पूरे प्रदेश और देश में ब्राह्मण समाज के आक्रोश को भड़का दिया था।

IAS Santosh Verma: ‘ब्राह्मण बेटी दान न करे तब तक आरक्षण’: विवादित टिप्पणी पर देशभर में रोष

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने 23 नवंबर को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में एक अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की। वर्मा ने सार्वजनिक मंच से कहा था, “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दे, तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।”

वर्मा के इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया, जिसके बाद ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश फैल गया। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद से, न केवल मध्य प्रदेश में बल्कि देश भर में वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी। इस बयान ने समाज के एक बड़े वर्ग को ठेस पहुंचाई, जिससे राज्य सरकार पर तुरंत एक्शन लेने का दबाव बढ़ गया था।

IAS Santosh Verma: ब्राह्मण संगठनों की एकजुटता और प्रदर्शन की चेतावनी

संतोष वर्मा की टिप्पणी से नाराज़ 65 ब्राह्मण संगठन एकजुट हो गए। उन्होंने अपनी नाराजगी और विरोध दर्ज कराने के लिए तुरंत प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार कर ली। संगठनों ने शुक्रवार को मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने और इसके बाद 14 दिसंबर को सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान कर दिया।

संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे प्रदेश बंद की तैयारी करेंगे। ब्राह्मण समाज के इस संगठित विरोध और आंदोलन की चेतावनी ने राज्य सरकार को त्वरित और सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।

हाईकोर्ट पर भी टिप्पणी: विवाद बढ़ने से सरकार पर बढ़ा दबाव

विवादों में घिरे संतोष वर्मा की एक और टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। एक अन्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, वर्मा ने यह कहा कि “एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा है… यही हाईकोर्ट है, जिससे हम संविधान के पालन की गारंटी मांगते हैं।”उनकी इस टिप्पणी से जुड़ा वीडियो सामने आते ही विवाद और भड़क गया, क्योंकि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका को निशाना बनाने जैसा था। इस दोहरी टिप्पणी के बाद राज्य सरकार पर कार्रवाई का दबाव चरम पर पहुँच गया।

फर्जी दस्तावेज़ों से प्रमोशन का आरोप: सीएम यादव के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

बढ़ते विवाद को देखते हुए, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संतोष वर्मा प्रकरण का संज्ञान लिया और जीएडी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सरकार के बयान में बताया गया कि वर्मा पर राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए पदोन्नति फर्जी और जाली आदेश तैयार करके लेने का आरोप है। इसके अलावा, उनके खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में आपराधिक प्रकरण भी लंबित हैं।

बयान में स्पष्ट कहा गया, “फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के आधार पर ली गई आईएएस की पदोन्नति गलत है। अतः आईएएस से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र शासन को प्रेषित किया जा रहा है।” इसके कुछ ही देर बाद, राज्य सरकार ने केंद्र को यह प्रस्ताव भेज दिया। सरकार ने यह भी कहा कि वर्मा के विरुद्ध जाली और फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर संनिष्ठा प्रमाण पत्र (Integrity Certificate) प्राप्त करने के आरोप में विभागीय जाँच अंतिम चरण में है, और वर्तमान प्रकरण में कारण बताओ नोटिस पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

राज्य सरकार IAS को बर्खास्त नहीं कर सकती

सरकार ने यह भी कहा कि वर्मा द्वारा लगातार ‘मर्यादाविहीन वक्तव्य’ जारी किए जा रहे हैं, इसलिए उन्हें ‘चार्जशीट’ जारी करने का निर्णय लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आईएएस अधिकारियों को निलंबित (Suspend) तो कर सकती है, लेकिन उन्हें बर्खास्त (Dismiss) करने की शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास होती है। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही लागू होती है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश सरकार को उन्हें बर्खास्त करने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजनी पड़ी।

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