IDF Manpower Crisis
IDF Manpower Crisis : इजरायल और मध्य पूर्व के युद्धग्रस्त हालातों के बीच इजरायली सेना (IDF) के भीतर से एक चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने सुरक्षा कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक में बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि युद्ध के निरंतर बढ़ते दबाव और मोर्चे पर सैनिकों की गंभीर कमी के कारण इजरायली सेना ‘अंदर से कमजोर होकर टूट सकती है’। जनरल जमीर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ रहा है और उसके सैन्य संसाधनों पर अभूतपूर्व बोझ पड़ रहा है।
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल जमीर ने मंत्रियों के सामने सेना की वर्तमान स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से ’10 बड़े खतरों’ का उल्लेख किया जो इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। जनरल ने सरकार से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर तुरंत सैन्य भर्ती, रिजर्व ड्यूटी और अनिवार्य सैनिक सेवा की अवधि बढ़ाने से संबंधित कड़े कानून पारित करें। उनका मानना है कि विधायी समर्थन के बिना सेना का ढांचा बिखर सकता है।
IDF प्रमुख ने अपनी चेतावनी में ‘रिजर्व सिस्टम’ का विशेष रूप से उल्लेख किया। इजरायल की सैन्य शक्ति का एक बड़ा हिस्सा उसके रिजर्व सैनिकों पर टिका होता है। जनरल जमीर ने कहा, “अगर भर्ती और सेवा विस्तार से जुड़े कानून जल्द से जल्द नहीं बनाए गए, तो सेना अपना सामान्य कामकाज भी सुचारू रूप से नहीं कर पाएगी।” उन्होंने मंत्रियों को आगाह किया कि रिजर्व सैनिकों पर क्षमता से अधिक बोझ डालना आत्मघाती साबित हो सकता है और इससे पूरी सैन्य व्यवस्था के ठप होने का जोखिम पैदा हो गया है।
सैनिकों की कमी की यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई है, बल्कि गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से यह और अधिक विकराल हो गई है। अक्टूबर 2023 में हुए हमास के हमलों के बाद से इजरायली सेना लगातार सरकार और संसद को सूचित कर रही है कि उसे तत्काल कम से कम 12,000 अतिरिक्त सैनिकों की आवश्यकता है। लगातार चलते ऑपरेशनों और लंबी खिंचती जंग ने मौजूदा सैनिकों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया है। जनवरी में भी जनरल जमीर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पत्र लिखकर इस आसन्न खतरे के बारे में सचेत किया था।
इजरायल के इस सैन्य संकट को और अधिक जटिल बना रहा है वहां का ‘अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स’ समुदाय का विवाद। परंपरा के अनुसार, इस समुदाय के येशिवा छात्रों को सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है। हालांकि, 2024 में इजरायल की हाई कोर्ट ने इस छूट को अवैध घोषित कर दिया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां इस छूट को बरकरार रखने के लिए नया कानून बनाने की कोशिश कर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा सैन्य सेवा के योग्य हैं, लेकिन वे सेना में शामिल नहीं हो रहे हैं।
जनरल एयाल जमीर की यह चेतावनी इजरायल के लिए एक बड़े अस्तित्वगत संकट का संकेत है। एक तरफ बाहरी दुश्मन हैं और दूसरी तरफ सेना के भीतर घटती संख्या का दबाव। यदि सरकार तुरंत कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो दुनिया की सबसे आधुनिक मानी जाने वाली सेनाओं में से एक ‘अंदरूनी कमजोरी’ का शिकार हो सकती है। अब यह पूरी तरह नेतन्याहू सरकार के फैसले पर निर्भर करता है कि वे सेना प्रमुख की इस गुहार को कितनी गंभीरता से लेते हैं और भर्ती नियमों में क्या बदलाव करते हैं।
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