AI Impact
AI Impact: नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की। उन्होंने एआई को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक “दोधारी तलवार” करार दिया। जॉर्जीवा के अनुसार, एआई में वैश्विक जीडीपी विकास दर को सालाना 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ाने की क्षमता है। यदि ऐसा होता है, तो विश्व की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-पूर्व स्तर से भी आगे निकल सकती है। उन्होंने इसे एक “शानदार अवसर” बताया जो आने वाले समय में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।
विशेष रूप से भारत के संदर्भ में जॉर्जीवा ने काफी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एआई का सही और संतुलित उपयोग भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प को पूरा करने में मदद करेगा। भारत वर्तमान में 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख रहा है, और आईएमएफ प्रमुख के अनुसार, एआई इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा इंजन साबित हो सकता है। उन्होंने भारत के मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), नवाचार, और देश की विशाल युवा आबादी की सराहना की, जो एआई के लोकतंत्रीकरण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की उम्मीदें हैं, वहीं जॉर्जीवा ने एक गंभीर चेतावनी भी दी। आईएमएफ के शोध के हवाले से उन्होंने बताया कि एआई वैश्विक स्तर पर 40% नौकरियों को प्रभावित करेगा। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह प्रभाव 60% तक हो सकता है, जबकि उभरते बाजारों में 40%। उन्होंने एआई के प्रभाव की तुलना “लेबर मार्केट पर आने वाली त्सुनामी” से की, जो अत्यंत शक्तिशाली है। विशेष रूप से एंट्री-लेवल जॉब्स और युवाओं के रोजगार पर सबसे ज्यादा जोखिम है। उन्होंने आगाह किया कि यदि सही नीतियां नहीं बनाई गईं, तो इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है।
समिट के समांतर, इंफोसिस इन्वेस्टर एआई डे 2026 में इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने भी एआई के भविष्य पर प्रकाश डाला। नीलेकणि का मानना है कि एआई क्रांति केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में एआई सिस्टम को संचालित करने, ‘ऑर्केस्ट्रेट’ करने और उन्हें बिजनेस मॉडल में प्रभावी ढंग से लागू करने पर ध्यान केंद्रित होगा। उन्होंने इसे स्मार्टफोन और क्लाउड क्रांति से कहीं अधिक मूलभूत बदलाव बताया, जो टैलेंट और बिजनेस ऑपरेशंस को पूरी तरह से बदल कर रख देगा। उनके अनुसार, पुरानी भूमिकाएं जैसे बेसिक टेस्टिंग कम प्रासंगिक हो जाएंगी।
चुनौतियों के बावजूद, नंदन नीलेकणि ने सकारात्मक पक्ष की ओर इशारा करते हुए अनुमान लगाया कि एआई वैश्विक स्तर पर 170 मिलियन (17 करोड़) नई हाई-ग्रोथ नौकरियां पैदा कर सकता है। इनमें एआई इंजीनियर्स, फॉरेंसिक एनालिस्ट्स, और एआई लीड्स जैसी भूमिकाएं शामिल होंगी। उनका संदेश स्पष्ट था कि डरने के बजाय, वर्कफोर्स को नई स्किल्स के साथ खुद को तैयार करना होगा। कुल मिलाकर, एआई समिट ने यह साफ कर दिया है कि एआई का भविष्य विकास और विस्थापन के बीच एक नाजुक संतुलन है।
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