IMF Economic Warning
IMF Economic Warning : इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने वैश्विक आर्थिक मंच पर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष लंबे समय तक खिंचता है, तो पूरी दुनिया को एक अत्यंत कठिन आर्थिक दौर से गुजरना पड़ सकता है। जॉर्जीवा के अनुसार, युद्ध की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर वैश्विक विकास दर को प्रभावित कर रहे हैं। विशेष रूप से तेल की कीमतों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले अवरोध वैश्विक रिकवरी की गति को धीमा कर सकते हैं, जिससे कई विकसित और विकासशील देशों के सामने मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।
आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग के दौरान जॉर्जीवा ने डेटा साझा करते हुए बताया कि 28 फरवरी के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ‘होर्मुज स्ट्रेट’ जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्गों के प्रभावित होने से कच्चे तेल और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है। यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। सप्लाई बाधित होने के कारण उन देशों की अर्थव्यवस्थाएं सबसे ज्यादा दबाव में हैं, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। यदि तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।
आईएमएफ प्रमुख ने एक और महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया—वह है खाद्य सुरक्षा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उर्वरकों की सप्लाई जल्द ही सामान्य नहीं हुई, तो कृषि उत्पादन में गिरावट आएगी। इसका परिणाम यह होगा कि महंगाई केवल ईंधन तक सीमित न रहकर खाने-पीने की चीजों तक फैल जाएगी। जॉर्जीवा ने कहा कि कम आय वाले देशों में यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है, क्योंकि वहां की आबादी अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करती है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में मामूली बढ़त भी वहां भुखमरी और सामाजिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।
बढ़ती महंगाई और अनिश्चितता के बीच, जॉर्जीवा ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को अत्यंत सावधानी बरतने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बदलाव को लेकर कोई भी जल्दबाजी भरा फैसला आत्मघाती साबित हो सकता है। जिन देशों में मुद्रास्फीति (Inflation) पहले से नियंत्रण में है, वहां के बैंकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन देशों में केंद्रीय बैंकों की विश्वसनीयता कम है या जहां महंगाई दर दोहरे अंकों में है, वहां वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सख्त मौद्रिक कदम उठाना जरूरी हो सकता है।
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए आईएमएफ ने खुद को तैयार कर लिया है। संस्था ने संकेत दिया है कि यदि युद्ध के कारण आर्थिक हालात और बिगड़ते हैं, तो सदस्य देशों को बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी। वर्तमान में आईएमएफ के 39 कार्यक्रम विभिन्न देशों में चल रहे हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में करीब 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त फंडिंग की मांग आ सकती है। जॉर्जीवा ने सदस्य देशों को आश्वस्त किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष किसी भी वित्तीय संकट को रोकने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ मदद के लिए तैयार खड़ा है।
अंत में, जॉर्जीवा ने दुनिया भर की सरकारों को लोकलुभावन फैसलों से बचने की सलाह दी। उन्होंने आगाह किया कि बिना किसी लक्ष्य के टैक्स कटौती करना या निर्यात पर प्रतिबंध लगाना जैसे कदम महंगाई की समस्या को और अधिक लंबा खींच सकते हैं। सरकारों को चाहिए कि वे केवल सबसे कमजोर वर्ग को ही लक्षित (Targeted) राहत प्रदान करें, न कि पूरी अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ाएं। सही और संतुलित नीतिगत फैसले ही इस वैश्विक आर्थिक भंवर से निकलने का एकमात्र रास्ता हैं।
Read More : US-Italy Relations : अमेरिका-इटली संबंधों में ऐतिहासिक गिरावट, ट्रंप और मेलोनी के बीच छिड़ी तीखी जुबानी जंग
Israel Lebanon ceasefire : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य पूर्व के…
Gujarat Tragedy: गुजरात के दाहोद जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई…
PBKS vs MI IPL 2026 highlights : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में…
IPL 2026 PBKS vs MI : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक सत्र में…
SDM vs MLA : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव की एक…
Laxmi Rajwade : छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती…
This website uses cookies.