IMF praises Indian economy
IMF praises Indian economy: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था की शानदार प्रगति की सराहना किए जाने के बाद देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस वैश्विक मुहर को आधार बनाकर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने न केवल उन्हें ‘निराशा का नेता’ करार दिया है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की छवि को धूमिल करने के प्रयासों के लिए उनसे देश की जनता से माफी मांगने की मांग भी की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब आईएमएफ ने भारत को वैश्विक विकास का सबसे महत्वपूर्ण ‘ग्रोथ इंजन’ बताया।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने आईएमएफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी, जिन्हें उन्होंने ‘लीडर ऑफ पेसिमिज्म’ (निराशा का नेता) कहा, अपने उन बयानों के लिए माफी मांगेंगे जो उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को नीचा दिखाने के लिए दिए थे? केशवन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर देश की आर्थिक स्थिति के बारे में झूठ बोला और नकारात्मक नैरेटिव सेट करने की कोशिश की। बीजेपी के अनुसार, आईएमएफ की यह तारीफ राहुल गांधी के ‘घटिया राजनीतिक एजेंडे’ को एक करारा जवाब है।
आईएमएफ ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया है कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का योगदान वैश्विक विकास दर में अग्रणी रहने वाला है। बीजेपी प्रवक्ता ने इसी तथ्य को रेखांकित करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी नाकाम राजनीति को चमकाने के लिए भारत की प्रगति को बदनाम करने से भी नहीं हिचकते। उन्होंने आगे कहा कि देश के लोग कांग्रेस को बार-बार इसलिए खारिज कर रहे हैं क्योंकि वे अपने देश की सफलताओं पर गर्व करने के बजाय उसे वैश्विक स्तर पर कमतर आंकते हैं।
यह हमला केवल हालिया रिपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पिछले साल की एक घटना से भी जुड़े हैं। दरअसल, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-भारत तेल सौदों पर नाराजगी जताते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ (मृत अर्थव्यवस्था) कह दिया था, तब राहुल गांधी ने उस बयान का समर्थन किया था। राहुल ने उस समय कहा था कि “पूरी दुनिया जानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था खत्म हो चुकी है, सिर्फ प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को यह तथ्य नजर नहीं आता।” बीजेपी अब इसी पुराने रुख को याद दिलाते हुए राहुल गांधी को घेर रही है कि आज अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उनके दावों को गलत साबित कर रही हैं।
राहुल गांधी लंबे समय से मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, विशेषकर बेरोजगारी, महंगाई और जीएसटी के कट्टर आलोचक रहे हैं। हालांकि, बीजेपी का तर्क है कि आलोचना और देश के आर्थिक चरित्र का अपमान करने में अंतर होता है। बीजेपी का मानना है कि जब वैश्विक एजेंसियां भारत की जीडीपी और विकास दर की तारीफ करती हैं, तब विपक्ष का उसे नकारना राष्ट्रहित के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि आईएमएफ की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है और राहुल गांधी का ‘झूठा प्रचार’ अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।
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