MP AI Video Controversy: सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श को हिला कर रख दिया है। दमोह ज़िले के सतरिया गांव में एक युवक को पंचायत के आदेश पर दूसरे युवक के पैर धोकर वही पानी पीने की ‘सजा’ दी गई। कारण बना एक एआई जेनरेटेड वीडियो, जिसे पीड़ित युवक ने शेयर किया था। इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
गांव के अनुज उर्फ अन्नू पांडे, जो पहले शराब बेचते पकड़े गए थे, का एक AI-जेनरेटेड वीडियो वायरल हुआ जिसमें उन्हें जूते की माला पहने दिखाया गया। यह वीडियो गांव के ही एक युवक ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। वीडियो को अपमानजनक मानते हुए गांव की पंचायत ने इस पर सख्त रुख अपनाया।
10 अक्टूबर को बुलाई गई पंचायत में वीडियो शेयर करने वाले युवक को बुलाया गया। वहां उसे आदेश दिया गया कि वह अनुज पांडे के पैर धोकर वही पानी पिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक ने भीड़ के सामने यह ‘सजा’ चुपचाप स्वीकार कर ली और कैमरे में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।
घटना के बाद अनुज पांडे और पीड़ित युवक दोनों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए। अनुज पांडे ने कहा, “हमारे बीच गुरु-शिष्य का संबंध है, उसने अपनी इच्छा से ऐसा किया। अगर किसी समाज को आपत्ति है तो मैं क्षमा चाहता हूं।”वहीं, पीड़ित युवक ने भी कहा, “मैंने गलती की थी, माफी भी मांगी है। वे हमारे पारिवारिक गुरु हैं, इस नाते मैंने उनके पैर धोए। कृपया इसे सामाजिक मुद्दा न बनाएं।”
एडिशनल एसपी सुजीत सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए छह लोगों के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। सभी आरोपी फरार हैं और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। गांव में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम और पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना ने सियासी रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस ने घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाली और संविधान विरोधी” बताया और बीजेपी सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने इसे दलितों और पिछड़ों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं का प्रतीक बताया।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत त्वरित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस पर हर घटना को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
यह घटना न सिर्फ एआई टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल भी उठाती है। पंचायतों के नाम पर आज भी कई गांवों में समानांतर ‘न्याय व्यवस्था’ चल रही है, जो अक्सर अमानवीय होती है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं पर न सिर्फ सख्त कार्रवाई करे, बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलाए कि डिजिटल युग में भी मानव गरिमा सर्वोपरि है।
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