Bihar election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं। सीट शेयरिंग को लेकर इंडिया गठबंधन में भले ही अभी तक तस्वीर साफ नहीं हुई हो, लेकिन कांग्रेस को भरोसा है कि अगले दो से तीन दिनों में सीट बंटवारे पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद छठ पूजा के बाद राज्य में चुनावी तूफान खड़ा करने की तैयारी है। कांग्रेस को इस बार उम्मीद है कि बिहार की जनता नीतीश कुमार को अब मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं देखना चाहती, और बीजेपी के पास कोई दमदार चेहरा भी नहीं है।

सीट बंटवारे में फंसा पेंच
इस बार के चुनाव में इंडिया गठबंधन के सामने सीट बंटवारा एक जटिल मसला बन गया है। इसकी बड़ी वजह है नई पार्टियों की एंट्री और वाम दलों की सीटों की बढ़ती मांग। इस बार मुकेश सहनी की वीआईपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे दल भी गठबंधन का हिस्सा बने हैं। वहीं, वाम दलों का दावा है कि पिछली बार उन्होंने 29 सीटों पर चुनाव लड़कर 16 सीटें जीती थीं, इसलिए इस बार वे 40 सीटों की मांग कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती फार्मूले के तहत:
आरजेडी 130-135 सीटों पर चुनाव लड़ेगी
कांग्रेस को 58 सीटें मिल सकती हैं
वाम दलों को 25-26 सीटें

वीआईपी को 15-16 सीटें
शेष सीटें पासवान गुट और झामुमो के बीच बांटी जाएंगी
मुख्यमंत्री पद को लेकर भी मतभेद
सीट बंटवारे के साथ-साथ मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भी मतभेद हैं। आरजेडी चाहती है कि तेजस्वी यादव को आधिकारिक रूप से गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए। जबकि कांग्रेस का रुख साफ है कि वो किसी भी राज्य में पहले से चेहरा घोषित नहीं करती। हालांकि, कांग्रेस यह मानती है कि बिहार में सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है और तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनना स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी खुद कोई औपचारिक घोषणा नहीं करेगी।
कांग्रेस का पूरा जोर चुनावी प्रचार पर
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, सीट शेयरिंग की औपचारिक घोषणा 21 अक्टूबर से पहले हो जाएगी, क्योंकि 21 से 28 अक्टूबर तक काली पूजा और छठ पर्व के कारण राजनीतिक गतिविधियों में विराम रहेगा। इसके बाद इंडिया गठबंधन जोरदार प्रचार अभियान की शुरुआत करेगा।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बिहार में संयुक्त रैलियां करेंगे
तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेतृत्व के साथ साझा मंच पर उपस्थिति दर्ज होगी
महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रियंका गांधी के प्रचार पर खास ध्यान
नीतीश के भविष्य को लेकर असमंजस का फायदा
कांग्रेस को उम्मीद है कि नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर असमंजस का सीधा लाभ इंडिया गठबंधन को मिलेगा। गठबंधन मानता है कि इस बार ईबीसी, दलित, मुस्लिम और यादव वोटों के साथ-साथ महिलाओं का समर्थन भी उन्हें मिलेगा।
बिहार चुनाव में इंडिया गठबंधन को लेकर रणनीति अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सीट बंटवारे की गुत्थी जल्द सुलझेगी और उसके बाद जोरदार प्रचार अभियान की शुरुआत होगी। कांग्रेस और आरजेडी को भरोसा है कि इस बार नीतीश कुमार के खिलाफ जन असंतोष, बीजेपी का कमजोर नेतृत्व और विपक्ष की एकजुटता बिहार की सत्ता में बदलाव का कारण बनेगी।
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