India Canada Relations: भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में एक नई ऊर्जा देखने को मिली जब विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और कनाडा की नव नियुक्त विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने सहयोग को पुनर्जीवित करने, पारस्परिक हितों को मजबूत करने और संवाद के तंत्रों को फिर से सक्रिय करने पर सहमति जताई।

स्वागत में झलकी गर्मजोशी
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने बैठक की शुरुआत गर्मजोशी भरे शब्दों के साथ की। उन्होंने कहा, “नमस्ते, आज सुबह हमें मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। नई दिल्ली में आपके साथ कनाडा-भारत संबंधों को और आगे बढ़ाने में सक्षम होना हमारे लिए गर्व की बात है।”उन्होंने प्रधानमंत्री कार्नी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हाल ही में कनानसकीस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई रचनात्मक बातचीत का भी ज़िक्र किया, जिसे उन्होंने वर्तमान द्विपक्षीय बैठक के लिए एक सकारात्मक पृष्ठभूमि बताया।

द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सक्रिय करने पर सहमति
बैठक में डॉ. एस जयशंकर ने भी हाल की प्रगति की सराहना की और कहा, “आज की हमारी बैठक 26 मई को हमारी टेलीफोन कॉल के बाद से चल रही रचनात्मक चर्चा को आगे बढ़ाती है। पिछले दो महीनों में भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंध लगातार आगे बढ़े हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश अब उन तंत्रों को बहाल करने और पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जो द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने में सहायक होंगे।
साझा मुद्दों पर चर्चा
बैठक के दौरान एक भारत-कनाडा संयुक्त वक्तव्य पर भी चर्चा की गई, जो दोनों देशों के साझा हितों को दर्शाता है। इसमें व्यापार, शिक्षा, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रवासी समुदायों और डिजिटल सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया है। अनीता आनंद ने इसे “एक व्यापक दस्तावेज़ जो हमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन देगा” कहा।
भविष्य की दिशा
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि संबंधों को केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि व्यावसायिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाया जाएगा। साथ ही, यह भी संकेत दिए गए कि व्यापारिक वार्ताओं और उच्च स्तरीय बैठकों की अगली श्रृंखला शीघ्र आयोजित की जा सकती है।
भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक संबंधों को एक नई दिशा देने की यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी सहायक होगा।
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