BRICS Alliance : वैश्विक अर्थव्यवस्था में अब एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। अमेरिका की टैरिफ नीति खासकर डोनाल्ड ट्रंप के दौर की ने दुनिया की बड़ी उभरती शक्तियों को करीब ला दिया है। भारत, चीन और रूस अब एक ऐसे आर्थिक और रणनीतिक गठजोड़ की ओर बढ़ रहे हैं, जो आने वाले समय में अमेरिका और यूरोप के वर्चस्व को चुनौती दे सकता है।

पुतिन और मोदी की रणनीतिक कूटनीति
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2025 के अंत तक भारत दौरे पर आ सकते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा भी प्रस्तावित है। ये दौरे सिर्फ औपचारिक मुलाकातें नहीं हैं, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और मुद्रा लेन-देन जैसे अहम मुद्दों पर ठोस रणनीतियों की तैयारी है।

एक-तिहाई वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण
भारत, चीन और रूस की कुल GDP (PPP आधार पर) 54 ट्रिलियन डॉलर के करीब है—जो दुनिया की लगभग एक-तिहाई अर्थव्यवस्था के बराबर है। इसके अलावा, ये तीनों देश करीब 3.1 अरब लोगों का घर हैं—यानि दुनिया की 38% आबादी इन देशों में रहती है। इनका आपसी सहयोग वैश्विक बाजार को नई दिशा दे सकता है।
डॉलर निर्भरता से बाहर निकलने की पहल
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत और चीन ने रूस से स्थानीय मुद्राओं में तेल खरीदना जारी रखा। इससे इन देशों की डॉलर पर निर्भरता कम हुई और अब यह त्रिकोणीय गठजोड़ “डॉलर के विकल्प” की संभावनाएं तलाश रहा है। वित्त विशेषज्ञ संदीप पांडे के अनुसार, यह बदलाव वैश्विक मुद्रा व्यवस्था को नया आकार दे सकता है।
सामरिक और ऊर्जा शक्ति में मजबूती
भारत, चीन और रूस केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य और ऊर्जा क्षेत्रों में भी बड़े खिलाड़ी हैं। तीनों देशों का संयुक्त रक्षा बजट 549 अरब डॉलर है और ये मिलकर दुनिया की 35% ऊर्जा का उपभोग करते हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति ने इन्हें यह सोचने पर मजबूर किया है कि अगर वे एक साथ आएं, तो अमेरिका की रणनीतिक पकड़ को कमजोर कर सकते हैं।
भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर
सेबी से मान्यता प्राप्त विश्लेषक अविनाश गोरक्षकर मानते हैं कि यह गठजोड़ भारत के लिए सुनहरा मौका है। भारत को रूस से सस्ता तेल, चीन से निवेश और अपनी IT सेवाओं और मानव संसाधन से बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। साथ ही, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) पर भारत अब मोलभाव की स्थिति में है।
वित्त विशेषज्ञ मनीष भंडारी का कहना है, “अब वक्त आ गया है कि दुनिया ‘चाइना+1’ नहीं, बल्कि ‘इंडिया+2’ की बात करे।” भारत अब सिर्फ दुनिया का मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है।
भारत, चीन और रूस का यह त्रिकोणीय समीकरण न केवल वैश्विक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आर्थिक संतुलन को भी बदल सकता है। आने वाले वर्षों में यह गठजोड़ अमेरिका और यूरोप की एकछत्र आर्थिक सत्ता को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार नजर आ रहा है।










