भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। तेहरान की ओर से भारत के प्रति जताए गए आभार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस फैसले और किस समर्थन ने दोनों देशों की दोस्ती को नई मजबूती दी, जानिए पूरी रिपोर्ट में।
भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। तेहरान की ओर से भारत के प्रति जताए गए आभार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस फैसले और किस समर्थन ने दोनों देशों की दोस्ती को नई मजबूती दी, जानिए पूरी रिपोर्ट में।

India Iran News : ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार और भारतीय जनता द्वारा दिखाए गए स्नेह और एकजुटता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से एक आधिकारिक संदेश साझा किया। दूतावास ने इस बात पर जोर दिया कि कठिन समय में भारत का यह मानवीय कदम दोनों देशों के बीच सदियों पुराने गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय रिश्तों की जीवंत मिसाल है। यह कूटनीतिक सद्भाव न केवल दोनों देशों के पुराने संबंधों को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में द्विपक्षीय दोस्ती को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का एक स्पष्ट संकेत भी है।


ईरानी दूतावास ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान की जनता भारत की इस हमदर्दी और सम्मान को सदैव याद रखेगी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत के राजनीतिक नेताओं, संसद सदस्यों, प्रबुद्ध विद्वानों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की तेहरान में उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया है कि दोनों राष्ट्रों के बीच की दोस्ती अत्यंत प्रगाढ़ और समय की कसौटी पर खरी है। दुख की इस घड़ी में भारत द्वारा दिखाई गई सहानुभूति ने न केवल ईरानी नेतृत्व का, बल्कि वहां के आम नागरिकों का भी दिल जीता है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि भारत का यह नैतिक समर्थन दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी को भविष्य में नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत की ओर से एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुँचा था। इस दल में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तथा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी तेहरान पहुंचकर शोक व्यक्त किया। महबूबा मुफ्ती ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में उनकी संवेदनाएं ईरान के साहसी नेतृत्व और वहां की जनता के साथ हैं और भारत हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा।
अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन इस वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक हमले में हुआ था, जिसके बाद से ही पूरे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है। तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में लाखों की संख्या में शोक संतप्त लोग शामिल हुए। खामेनेई के निधन के उपरांत उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उनके अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में सार्वजनिक रूप से शामिल न होने की खबरें भी सामने आई हैं। यह घटनाक्रम न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव है, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित करने वाला है।



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