US India News: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने के संकेत उस समय मिले जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। सोमवार, 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक के बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

रुबियो बोले – भारत, अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार
मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मार्को रुबियो का बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने भारत की भूमिका को अमेरिका के लिए “बेहद महत्वपूर्ण” बताया। रुबियो ने कहा, “भारत के साथ हमारे संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से भी अहम हैं। ट्रेड, डिफेंस, एनर्जी, फार्मा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत की भागीदारी काबिले-तारीफ है।” इस बयान के ज़रिए साफ संकेत मिले हैं कि अमेरिका, भारत को Indo-Pacific क्षेत्र में एक मज़बूत भागीदार के रूप में देख रहा है।

ट्रेड डील पर फिर खुल सकती है बातचीत
बीते वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड को लेकर कुछ तनावपूर्ण क्षण भी आए हैं। खासतौर पर जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगा दिए थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी दूरी देखने को मिली। अब मार्को रुबियो के रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश एक बार फिर व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
H-1B वीजा शुल्क से उपजा विवाद
हालिया दिनों में H-1B वीजा को लेकर भी भारत-अमेरिका संबंधों में खिंचाव आया है। ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा पर $100,000 तक का शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है, जिससे भारत का IT सेक्टर खासा प्रभावित हुआ है। भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, और ऐसे में यह कदम भारत के हितों के खिलाफ माना जा रहा है। हालांकि, रुबियो और जयशंकर की बैठक के बाद यह उम्मीद बनी है कि इस मुद्दे पर भी बातचीत का रास्ता खुलेगा।
जयशंकर ने दी मुलाकात की जानकारी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अच्छी बातचीत हुई। हमने द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। हम भविष्य में भी संवाद जारी रखेंगे।”

भारत और अमेरिका के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन हालिया बातचीत से यह स्पष्ट है कि दोनों देश एक बार फिर सामरिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में ट्रेड डील और वीजा जैसे जटिल मुद्दों पर समाधान की संभावना से दोनों देशों के बीच सहयोग की राह और भी स्पष्ट हो सकती है।











