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POK human rights abuse: पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता पर भारत का कड़ा बयान, कहा – ‘पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघन के लिए ठहराया जाए जिम्मेदार’

POK human rights abuse: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आम नागरिकों पर हो रहे अत्याचार और हिंसा को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और संसाधनों की संगठित लूट का परिणाम हैं। मंत्रालय ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और पाकिस्तान का इन क्षेत्रों पर कोई कानूनी दावा नहीं बनता।

पाकिस्तानी सेना पर निर्दोषों के खिलाफ अत्याचार का आरोप

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, “हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों की खबरें देखी हैं, जिनमें पाकिस्तानी सेना निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार कर रही है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार को इन भयावह मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन में अब तक 12 की मौत, संयुक्त राष्ट्र से लगाई गुहार

29 नवंबर से पीओके के कई हिस्सों में लोग महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों की लूट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी में अब तक 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पीओके के राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

पाकिस्तान की ‘संरचित लूट’ पर भारत का हमला

भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का पीओके पर कब्जा न केवल अवैध है बल्कि वह वहां के प्राकृतिक संसाधनों को व्यवस्थित रूप से लूट रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा, “इन इलाकों में पाकिस्तान के अवैध कब्जे से वहां की जनता को सिर्फ शोषण, भुखमरी और हिंसा मिली है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि पाकिस्तान को उसकी जिम्मेदारियों से बचने न दिया जाए।

मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा

भारत के इस आधिकारिक बयान के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। पीओके में लंबे समय से मानवाधिकार हनन, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और राजनीतिक आवाजों को कुचलने जैसे मामलों की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। अब जबकि यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र स्तर पर पहुंच चुका है, पाकिस्तान के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।पाक अधिकृत कश्मीर में जारी प्रदर्शन और सेना की बर्बरता पाकिस्तान की विफल शासन प्रणाली और अत्याचारी रवैये को उजागर करती है। भारत ने इस मुद्दे पर न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की पोल खोली है, बल्कि PoK की जनता के साथ खड़े होने का मजबूत संदेश भी दिया है।

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