Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत का पहला लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर ‘दिशा’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार करते हुए गुजरात के भरूच स्थित दहेज पोर्ट पर सुरक्षित पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस शांति समझौते के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग निर्बाध रूप से खुला रहेगा, जिससे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति का प्रवाह सुचारू रूप से बना रहेगा। यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को स्थिर रखने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और भारत के ऊर्जा आयात का महत्व
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में ‘दिशा’ LNG कैरियर का सुरक्षित भारत पहुँचना देश के ऊर्जा आयात तंत्र के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। यह टैंकर पश्चिम एशिया से भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस लेकर भारत आया है। इस मार्ग का सुरक्षित होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व के देशों से आयात करता है। टैंकर की सुरक्षित आवाजाही ने भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद जगाई है।

तनाव के बीच समुद्री व्यापार का फिर से सामान्य होना
पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर गहरी चिंताएं और आशंकाएं बनी हुई थीं। कई देशों को यह डर सता रहा था कि यदि यह मार्ग अवरुद्ध हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा। हालांकि, ‘दिशा’ की सफलतापूर्वक वापसी और दहेज पोर्ट पर सुरक्षित डॉकिंग से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। यह शांति का संदेश है कि अब आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की संभावनाएं कम हो गई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है।
विशाल कार्गो और नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकारी प्रयास
‘दिशा’ कैरियर की यह यात्रा एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसने मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद 62,370 मीट्रिक टन LNG का कार्गो सुरक्षित भारत पहुँचाया है। इस बीच, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) भी पूरी तरह सतर्क है। मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार फारस की खाड़ी क्षेत्र से भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके अलावा, सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर है। मंत्रालय ने ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग’ के माध्यम से अब तक 3,639 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिसमें पिछले 72 घंटों में वापस आए 47 नाविक भी शामिल हैं। सरकार का यह प्रयास भारतीय समुद्री पेशेवरों के मनोबल को बनाए रखने के लिए सराहनीय है।
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