Weather Update: भारत में मानसून के आगमन के साथ ही कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई तक भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है। बुधवार से शुरू हुआ बारिश का यह सिलसिला गुरुवार सुबह तक लगातार जारी रहा, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। लगातार मूसलाधार बारिश के कारण राजधानी के निचले इलाकों, विशेषकर मुनिरका और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में भारी जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऑफिस जाने वाले लोगों को सड़कों पर पानी और धीमी गति से रेंगते ट्रैफिक के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ घंटों तक रुक-रुक कर भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

पुणे के मोशी में इमारत ढही: मलबे के नीचे दबे जिंदगी के संघर्ष
महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी इलाके में बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी। पिंपरी-चिंचवाड़ के पास स्थित इस इलाके में कचरे का एक विशाल ढेर अचानक एक तीन मंजिला इमारत पर गिर पड़ा, जिससे पूरी इमारत मलबे के ढेर में बदल गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस इमारत में नगर निगम की एक निजी अपशिष्ट प्रसंस्करण कंपनी का कार्यालय स्थित था। हादसे के तुरंत बाद एनडीआरएफ (NDRF) की 5वीं बटालियन, भारतीय सेना, दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। गुरुवार सुबह 6:30 बजे तक मलबे से 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है।

गुजरात का सूरत जलमग्न: भारी बारिश से जनहानि और बाढ़ जैसे हालात
गुजरात के सूरत शहर में पिछले 24 घंटों के भीतर 358 मिमी बारिश ने हाहाकार मचा दिया है। शहर के निचले इलाके पूरी तरह से डूब गए हैं, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं—जैसे बिजली गिरने, पेड़ गिरने और डूबने—के कारण कम से कम नौ लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाते हुए अब तक 3,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। वराछा के पोद्दार आर्केड सहित कई व्यावसायिक परिसरों और रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की सूचना है। भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन ऊंची इमारतों की मदद ले रहा है।
ट्रेनों और उड़ानों पर बारिश का असर: परिवहन सेवाएं चरमराईं
मुंबई की ‘लाइफलाइन’ कही जाने वाली उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाएं भी भारी बारिश की चपेट में हैं। पड़ोसी पालघर जिले के वसई-विरार खंड और दक्षिण गुजरात के कई स्थानों पर पटरियों पर जलभराव के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। भोर घाट खंड में भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे मार्ग पर रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता के कारण नौ उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा। हालांकि, बाद में ये उड़ानें सुरक्षित उतर गईं, लेकिन हवाई सेवा पर इसका बुरा असर पड़ा है। वहीं, रायगढ़ जिले में उल्हास नदी के उफान पर आने से नेरल और कर्जत स्टेशनों के बीच भी रेल सेवा कुछ समय के लिए बाधित रही।
नासिक में नदियां उफान पर: बांधों से पानी छोड़े जाने का अलर्ट
नासिक जिले में निरंतर बारिश के कारण गोदावरी, कड़वा और गिरना नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने पालखेड़ और नंदुर मधमेश्वर बांधों से पानी छोड़े जाने के मद्देनजर निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने पशुधन और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। नदियां उफान पर होने के कारण नासिक के कई ग्रामीण रास्तों को बंद करना पड़ा है। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण पहाड़ी इलाकों में संपर्क कटने का डर बना हुआ है।
केरल के वायनाड में आपदा: सुरंग परियोजना स्थल पर तलाशी अभियान
केरल के वायनाड में बारिश ने फिर से तबाही मचाई है। एक सुरंग परियोजना स्थल पर मिट्टी का बड़ा ढेर गिरने से पांच लोग लापता हो गए, जिनकी तलाश का कार्य बुधवार को भी जारी रहा। केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशान ने स्वयं घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों की निगरानी की है। राज्य में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर दिया है, जिससे भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। राहत टीमें कीचड़ और मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं।
केंद्र सरकार का सक्रिय रुख: राज्यों को हर संभव मदद का भरोसा
भारी बारिश के चलते देश के विभिन्न हिस्सों—केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और जम्मू-कश्मीर—में पैदा हुई गंभीर स्थिति पर केंद्र सरकार पूरी तरह नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जम्मू के डोडा में अचानक आई बाढ़ और अन्य राज्यों में हुई त्रासदियों पर दुख व्यक्त करते हुए केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में चौबीसों घंटे तैनात हैं। प्रशासन की ओर से आम जनता से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के पास न जाएं, जलभराव वाले रास्तों से बचें और मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें। मानसून का यह उग्र रूप फिलहाल थमने के संकेत नहीं दे रहा है, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।
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