India Naxalism : भारत ने पिछले 15 सालों में नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। सरकार के प्रयासों का परिणाम अब सामने आने लगा है। लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2013 में जहां देश में 126 नक्सल प्रभावित जिले थे, अब अप्रैल 2025 तक यह संख्या घटकर केवल 18 रह जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि नक्सलियों की हिंसा और सुरक्षा बलों तथा नागरिकों की मौतों में 2010 के मुकाबले 2024 में 81 प्रतिशत और 85 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह उपलब्धि भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और योजना के तहत संभव हो पाई है।
झारखंड में नक्सलवाद पर सरकार के प्रयासों के नतीजे और भी स्पष्ट दिखे हैं। मंत्री के मुताबिक, झारखंड में 2009 में नक्सल हिंसा की 742 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2024 में घटकर केवल 69 रह गई हैं। पिछले छह महीनों में राज्य में 103 हिंसक घटनाएं हुईं, जिसमें 25 नक्सलियों को मारा गया, 276 गिरफ्तार किए गए और 32 ने आत्मसमर्पण किया। झारखंड में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2013 में 21 थी, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 2 रह जाएगी।
भारत सरकार ने नक्सलवाद से निपटने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनकी वजह से नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सका। 2015 में राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना (National Policy and Action Plan) को मंजूरी दी गई, जिसमें सुरक्षा, विकास और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा की रणनीतियां शामिल की गईं। इस नीति के तहत सुरक्षा उपायों के साथ-साथ विकास परियोजनाएं, रोजगार और शिक्षा योजनाओं को भी बढ़ावा दिया गया।
सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत किया और सीआरपीएफ की कोबरा इकाइयों जैसे विशेष बलों की तैनाती की। साथ ही, राज्य पुलिस बल को भी मॉडर्नाइज किया गया और बेहतर हथियारों, वाहनों और संचार प्रणालियों से लैस किया गया। विशेष अवसंरचना योजनाओं के तहत दूरदराज के क्षेत्रों में पुलिस स्टेशन, हेलीपैड और सुरक्षित शिविरों का निर्माण किया गया।
नक्सलवाद पर काबू पाने के लिए विकास परियोजनाएं शुरू की गईं, जिससे स्थानीय लोग मुख्यधारा में शामिल हो सके। सरकार ने गरीब जिलों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल प्रशिक्षण जैसी योजनाओं का संचालन किया। “आकांक्षी जिला कार्यक्रम” और “विशेष केंद्रीय सहायता योजना” के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया गया।
नक्सलवाद से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण नीति सरकार ने अपनाई है—वह है आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति। इस योजना के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए आर्थिक सहायता, रोजगार के अवसर, और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे लाभ प्रदान किए गए। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 5 लाख रुपये तक की राशि, प्रशिक्षण और अन्य फायदे दिए गए।
सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और भी सशक्त बनाने के लिए SAMADHAN योजना की शुरुआत की। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 2017 में इस योजना का ऐलान किया था, जो नक्सलवादियों के खिलाफ लड़ाई के लिए एक बहुआयामी रणनीति है। SAMADHAN में शामिल बिंदुओं में स्मार्ट लीडरशिप, आक्रामक रणनीति, खुफिया जानकारी, तकनीक का उपयोग और क्षेत्रीय कार्य योजनाएं शामिल हैं। यह रणनीति केवल सेना-पुलिस ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास, सामाजिक समावेशन और सुरक्षा का संतुलित मॉडल है, जिससे नक्सलवादी गतिविधियों की जड़ें कमजोर हो रही हैं।
इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में सफलता पाई है। नक्सलियों की हिंसा में भारी गिरावट आई है और नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी कमी आई है। यह सरकार की बहुआयामी रणनीति का परिणाम है, जिसमें सुरक्षा, विकास और सामाजिक समावेशन को समान रूप से प्राथमिकता दी गई है। इन कदमों ने नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और आने वाले समय में भारत को नक्सलवाद से मुक्त बनाने की उम्मीदें और भी मजबूत हो गई हैं।
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