India-New Zealand Trade Deal : भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA के लागू होने की दिशा में 16 सितंबर 2026 को एक अहम कदम पूरा हो गया। न्यूजीलैंड की संसद ने समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कानून को मंजूरी दे दी। बिल के पक्ष में 93 और विरोध में 29 वोट पड़े। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद की मंजूरी का स्वागत किया और कहा कि समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने में मदद करेगा।
पहले दिन न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर नहीं लगेगा शुल्क
FTA के लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के करीब 57 प्रतिशत निर्यात को भारत में पहले दिन से ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा। समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के करीब 95 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ या तो खत्म हो जाएंगे या उनमें महत्वपूर्ण कटौती होगी। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, लंबी अवधि में करीब 82 प्रतिशत निर्यात पूरी तरह शुल्क मुक्त होगा, जबकि बाकी 13 प्रतिशत पर टैरिफ में बड़ी कटौती की जाएगी।
लकड़ी, ऊन, मांस और समुद्री उत्पादों को मिलेगा लाभ
समझौते में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख निर्यात उत्पादों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। भेड़ के मांस, ऊन, कोयला और अधिकांश फॉरेस्ट्री एवं लकड़ी उत्पादों पर तत्काल शुल्क समाप्त करने का प्रावधान है। समुद्री उत्पादों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच की व्यवस्था की गई है। कीवीफ्रूट, सेब और अन्य कृषि उत्पादों के लिए टैरिफ कटौती तथा कोटा आधारित व्यवस्था शामिल है।
भारत को न्यूजीलैंड में मिलेगा व्यापक ड्यूटी-फ्री बाजार
भारत के लिए भी यह समझौता बाजार पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के अनुसार, FTA के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। इससे टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बाजार विस्तार के अवसर मिल सकते हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों को भारत ने रखा बाहर
भारत ने न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए अपने बाजार को पूरी तरह नहीं खोला है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार भारत ने 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायत की पेशकश की है, जबकि 29.97 प्रतिशत को बाहर रखा गया है। बाहर रखी गई प्रमुख श्रेणियों में डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसका उद्देश्य घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा बनाए रखना है।
15 साल में 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता
FTA में व्यापार के साथ निवेश को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भारत सरकार के अनुसार न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार के दस्तावेजों के मुताबिक इससे विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि तकनीक, कौशल विकास और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं।
कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए भी समझौते में प्रावधान
समझौते में Agricultural Productivity Partnerships यानी APP का प्रावधान भी शामिल है। इसका उद्देश्य सेब, कीवीफ्रूट और शहद जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत सरकार के अनुसार, ऐसे प्रावधान किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं, जबकि संबंधित कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच में कुछ सुरक्षा उपाय भी रखे गए हैं।
अप्रैल 2026 में नई दिल्ली में हुआ था FTA पर हस्ताक्षर
भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में इस FTA पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए थे। भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड की ओर से टॉड मैक्ले ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद न्यूजीलैंड में समझौते को लागू करने के लिए संसदीय और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर जोर
FTA का व्यापक उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में बाजार पहुंच बढ़ाना तथा टैरिफ बाधाओं को कम करना है। न्यूजीलैंड सरकार ने कहा है कि समझौते के लागू होने से उसके निर्यातकों के लिए भारत के बड़े बाजार में नए अवसर खुलेंगे। हालांकि FTA की वास्तविक प्रभावशीलता व्यापार, निवेश, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और कारोबारी मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी। समझौता दोनों देशों की संबंधित औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद लागू होगा।
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