Nuclear Power India : भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) ने सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) की एक नई कंसल्टिंग सब्सिडियरी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित कंपनी उन निजी संस्थाओं को तकनीकी और व्यावसायिक सलाह देगी, जो देश के खुले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करना चाहती हैं।
डिजाइन से ऑपरेशन तक मिलेगी तकनीकी मदद
प्रस्तावित कंसल्टिंग यूनिट निजी कंपनियों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता उपलब्ध करा सकती है। इसमें रिएक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग, संचालन एवं प्रबंधन, नियामकीय प्रक्रियाओं और अन्य तकनीकी मामलों से जुड़ी सलाह शामिल होगी। खास तौर पर प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) स्थापित करने की योजना बनाने वाली कंपनियों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। NPCIL फिलहाल देश में इस तकनीक पर आधारित परमाणु संयंत्रों के संचालन का व्यापक अनुभव रखती है।
2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य
भारत ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करना चाहता है। सरकार ने 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसमें NPCIL की ओर से करीब 54 GW क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकारी संस्थाओं के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी अहम माना जा रहा है।
SHANTI Act से निजी क्षेत्र के लिए खुला रास्ता
पिछले साल दिसंबर में सरकार ने Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act, 2025 लागू किया था। इस कानून के जरिए निजी क्षेत्र के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खोला गया। इससे पहले परमाणु ऊर्जा उत्पादन मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में था और NPCIL देश के मौजूदा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती थी।
NPCIL से तकनीकी सलाह मांग रही कंपनियां
परमाणु ऊर्जा उत्पादन में विशेषज्ञता रखने वाली NPCIL वर्तमान में देश की प्रमुख सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी है। ऐसे में निजी कंपनियां PHWR तकनीक पर आधारित परियोजनाओं को लेकर NPCIL से तकनीकी सलाह मांग रही हैं। अधिकारियों के अनुसार कई संस्थाओं ने स्वदेशी तकनीक वाले रिएक्टर स्थापित करने में रुचि दिखाई है। इन कंपनियों के लिए PHWR तकनीक का सुरक्षा रिकॉर्ड और लागत से जुड़े फायदे आकर्षण का कारण बताए जा रहे हैं।
विदेशी रिएक्टर तकनीक को लेकर भी सलाह की मांग
सिर्फ स्वदेशी तकनीक ही नहीं, बल्कि विदेशी तकनीक पर आधारित लाइट वॉटर रिएक्टर लगाने में रुचि रखने वाली संस्थाएं भी NPCIL से संपर्क कर रही हैं। ऐसे में एक अलग कंसल्टिंग इकाई की जरूरत महसूस की गई है, ताकि तकनीकी विशेषज्ञता को व्यवस्थित तरीके से निजी कंपनियों तक पहुंचाया जा सके। DAE ने SHANTI Act के तहत नए नियमों और कानूनों का ड्राफ्ट भी जारी किया है।
नए नियमों में निजी कंपनियों को मिल सकती है बड़ी छूट
प्रस्तावित नियमों के तहत निजी कंपनियों को परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने, उसका स्वामित्व रखने, संचालन करने और भविष्य में उसे डीकमीशन करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति मिल सकती है। इससे परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, परमाणु सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगा।
कंसल्टिंग कंपनी का शुरुआती ढांचा
प्रस्तावित NPCIL सब्सिडियरी में शुरुआत में NPCIL के तीन नॉमिनी डायरेक्टर शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा कंपनी के रोजमर्रा के संचालन के लिए एक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और एक चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव है। NPCIL जरूरत के अनुसार इस नई कंपनी में शुरुआती इक्विटी निवेश भी कर सकती है, जिसका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे और दूसरी परिसंपत्तियां तैयार करने में किया जा सकेगा।
निजी कंपनियों की लंबे समय से थी ऐसी मांग
निजी क्षेत्र की कंपनियां ऐसी स्वतंत्र संस्था की जरूरत पर जोर देती रही हैं, जो उन्हें परमाणु परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न चरणों में विशेषज्ञ सलाह दे सके। इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, रिएक्टर तकनीक, साइट चयन, संचालन, रखरखाव और नीतिगत सहायता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। DAE और बिजली मंत्रालय की पिछली रिपोर्ट में भी स्वदेशी PHWR और अन्य परमाणु तकनीकों के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने वाली विशेष संस्था की जरूरत बताई गई थी।
परमाणु ऊर्जा विस्तार को मिलेगी नई गति
NPCIL की प्रस्तावित कंसल्टिंग सब्सिडियरी को मंजूरी मिलने पर भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश की प्रक्रिया आसान हो सकती है। सरकार का लक्ष्य केवल परमाणु क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की तकनीकी और वित्तीय भागीदारी के जरिए इसे बड़े स्तर पर विकसित करना है। ऐसे में आने वाले वर्षों में NPCIL की विशेषज्ञता और नई कंसल्टिंग इकाई देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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