India Russia Trade
India Russia Trade: रूस के बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक (जियो-इकॉनॉमिक) प्रभाव और बदलती परिस्थितियों के बीच, भारत अब अपनी विदेश व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव कर रहा है। अभी तक भारत रूस से मुख्य रूप से तेल और उर्वरक (फर्टिलाइजर) का बड़ा आयातक रहा है, लेकिन अब वह इस रिश्ते को एक नया आयाम देना चाहता है। सरकार की योजना है कि फार्मास्यूटिकल्स से लेकर इंजीनियरिंग, कृषि और समुद्री उत्पादों तक कई प्रमुख क्षेत्रों में रूस के बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की जाए और एक बड़ा निर्यात पुश (Export Push) दिया जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से काम कर रहा है, जिसके माध्यम से भारत अपनी भूमिका एक आयातक से बदलकर एक महत्वपूर्ण निर्यात भागीदार की ओर मोड़ना चाहता है।
भारत सरकार का यह तेज कदम इसलिए आवश्यक है क्योंकि रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) वर्तमान में 59 अरब डॉलर के चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत रूस से जितनी वस्तुएँ खरीद रहा है, उसकी तुलना में बहुत कम बेच पा रहा है। इस विशाल असंतुलन को कम करने के लिए, सरकार की प्राथमिकता यह है कि रूस भारतीय सामानों पर लगे विभिन्न नियम और नॉन-टैरिफ रुकावटों (Non-Tariff Barriers) को कम करे, ताकि हमारे उत्पाद रूसी बाजार में अधिक आसानी से और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचे जा सकें।
भारत सरकार ने रूस को उन सभी व्यापारिक बाधाओं की एक विस्तृत सूची सौंपी है, जिन्हें तत्काल दूर करने की आवश्यकता है।
समुद्री उत्पाद (सी-फूड): भारत ने रूस को अकेले समुद्री उत्पादों पर लगी 65 से अधिक नॉन-टैरिफ रुकावटों की सूची दी है, जो भारतीय सी-फूड के निर्यात में बाधा डाल रही हैं।
फार्मा सेक्टर की समस्याएँ: दवा क्षेत्र में भी चार प्रमुख और जटिल दिक्कतें हैं: दवाओं का मुश्किल रजिस्ट्रेशन, क्लिनिकल ट्रायल की अत्यधिक सख्ती, बाजार में सीमित प्रवेश और कीमत तय करने के कठिन नियम। भारत, जो दुनिया का एक बड़ा दवा निर्यातक है, के लिए ये नियम बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं और निर्यात बढ़ाने में बाधा पैदा कर रहे हैं।
ईएईयू की विशाल बाजार भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME), के लिए नए अवसर ला सकती है। हालाँकि, वर्तमान स्थिति यह है कि रूस अपने कुल बाहरी आयात का मात्र 2.3% हिस्सा ही भारत से खरीदता है, जो कि बहुत कम है। इस नए प्रस्तावित समझौते में, भारत उन उत्पादों का निर्यात बढ़ाना चाहता है जिनमें उसकी विशेषज्ञता है। इन उत्पादों में दवाइयाँ, केमिकल, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, मोटर गाड़ियाँ (Automobiles), कृषि से जुड़े उत्पाद और सी फूड शामिल हैं।
सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि इस आगामी व्यापार समझौते में सोना और अन्य कीमती धातुएँ शामिल नहीं की जाएंगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ इसी तरह का समझौता होने के बाद भारत में सोना-चांदी का आयात अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया था, जिससे देश की चिंताएँ बढ़ी थीं।
इसके अलावा, चूँकि ईएईयू के साथ होने वाले वस्तु व्यापार समझौते में सामान्यतः सेवा क्षेत्र (Service Sector) शामिल नहीं होता, इसलिए भारत रूस के साथ सेवाओं के लिए एक अलग समझौते (Separate Services Agreement) पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रहा है।
ईएईयू के साथ चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं में कई महत्त्वपूर्ण तकनीकी और नीतिगत मुद्दे शामिल होंगे। इनमें टैरिफ दरें, कस्टम्स प्रशासन, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) नियम, तकनीकी मानक, प्रतिस्पर्धा नीतियाँ और ई-कॉमर्स जैसे विषय शामिल हैं। सरकार ने भारतीय उद्योग जगत से भी विस्तृत फीडबैक मांगा है, विशेष रूप से रूस तक माल पहुँचाने में आने वाली शिपिंग दिक्कतों, कस्टम्स डॉक्यूमेंटेशन और बैंकिंग से जुड़ी चुनौतियों पर।
Read More : Pulsar Offer: 15 हजार की बचत! पल्सर पर बजाज का बंपर ऑफर, हीरो-यामाहा की बढ़ी टेंशन
IPL 2026 DC vs MI : भारतीय प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन में आज…
Pakistan Crisis : कहते हैं कि जब वक्त खराब होता है, तो हर तरफ से…
CBSE New Syllabus : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एम के स्टालिन ने…
Bihar Liquor Smuggling : दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से चलकर रक्सौल जाने वाली सत्याग्रह…
Raipur ILS Hospital Accident : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर स्थित ILS…
GIB Chick Birth : वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में 2026 का यह साल एक सुनहरे…
This website uses cookies.