India Russia Trade : अमेरिका की ओर से रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और डॉलर आधारित भुगतान पर सख्ती के बावजूद भारत और रूस के बीच व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच कारोबार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका तेजी से घटती दिखाई दे रही है। रूस के एक वरिष्ठ बैंकर के अनुसार, भारत और रूस के बीच होने वाले व्यापार में करीब 96 फीसदी भुगतान अब रुपये और रूबल में किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में सीधे कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।
रुपये और रूबल में भुगतान व्यवस्था कैसे काम कर रही है?
रूस के प्रमुख बैंक स्बेरबैंक की भारतीय इकाई के प्रमुख इवान नोसोव ने भारत-रूस भुगतान व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच तैयार किया गया पेमेंट सिस्टम फिलहाल प्रभावी ढंग से काम कर रहा है और भुगतान को लेकर कोई बड़ी परेशानी सामने नहीं आ रही है। उन्होंने इसे रूस के अन्य देशों के साथ मौजूद भुगतान तंत्रों में सबसे भरोसेमंद व्यवस्थाओं में से एक बताया।
39 बैंक दे रहे हैं कारोबार को भुगतान सुविधा
भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्रा में कारोबार को बढ़ाने में बैंकिंग नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। मौजूदा व्यवस्था के तहत 22 रूसी बैंक और 17 भारतीय बैंक दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापारिक लेनदेन को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इससे कंपनियों और कारोबारियों को डॉलर पर निर्भर हुए बिना रुपये और रूबल में भुगतान करने की सुविधा मिल रही है।
90 फीसदी ट्रांजैक्शन दस मिनट में होते हैं पूरे
स्थानीय मुद्राओं में भुगतान के साथ-साथ दोनों देशों ने तेज भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया है। इवान नोसोव के अनुसार, भारत और रूस के बीच करीब 90 फीसदी लेनदेन 10 मिनट के भीतर प्रोसेस हो जाते हैं। वहीं, आधे से अधिक ट्रांजैक्शन एक मिनट से भी कम समय में पूरे हो जाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों की भुगतान व्यवस्था केवल स्थानीय मुद्रा आधारित ही नहीं, बल्कि काफी तेज भी हो गई है।
2024 में भारत-रूस व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
भारत और रूस के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंधों में तेजी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से इसमें लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन काफी बदला।
रूसी तेल खरीद से बढ़ा द्विपक्षीय कारोबार
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल कई बार अपेक्षाकृत आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हुआ। इसका फायदा भारतीय रिफाइनरियों को मिला और रूस भारत के लिए प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया। हालांकि, वर्ष 2025 में प्रतिबंधों के और कड़े होने से दोनों देशों के कारोबार पर दबाव पड़ा। इसके बावजूद 2026 की पहली छमाही में व्यापारिक गतिविधियों में दोबारा तेजी देखने को मिली।
रुपये का बड़ा भंडार बनना बनी थी चुनौती
स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने के रास्ते में भारत और रूस के सामने एक बड़ी समस्या भी आई थी। भारत रूस से जितना कच्चा तेल खरीद रहा था, उसके मुकाबले रूस को भारत से उतनी मात्रा में वस्तुओं का निर्यात नहीं हो रहा था। परिणामस्वरूप रूसी कारोबारियों के पास बड़ी मात्रा में भारतीय रुपये जमा होने लगे। चूंकि रुपया पूरी तरह परिवर्तनीय मुद्रा नहीं है, इसलिए इन रुपयों का अन्य जगह इस्तेमाल करना आसान नहीं था।
बैंकिंग नेटवर्क से भुगतान की समस्या हुई कम
दोनों देशों ने बैंकिंग नेटवर्क और भुगतान तंत्र को मजबूत करके रुपये के अधिक जमा होने जैसी चुनौती से निपटने की दिशा में काम किया है। बेहतर बैंकिंग कनेक्टिविटी और तेज भुगतान व्यवस्था ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को आसान बनाया है। इससे कारोबारियों को भुगतान प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल करने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम
भारत-रूस के बीच रुपये और रूबल में बढ़ता कारोबार केवल दोनों देशों के लिए आर्थिक महत्व नहीं रखता। इसका असर वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि अधिक देश द्विपक्षीय व्यापार में अपनी स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाते हैं, तो हर लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिशों को गति मिल सकती है।
भारत के लिए रूस के साथ स्थानीय मुद्रा व्यापार क्यों अहम?
भारत के लिए रूस एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की मजबूत व्यवस्था से पश्चिमी वित्तीय प्रणाली और डॉलर आधारित भुगतान चैनलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को प्रतिबंधों और वैश्विक वित्तीय दबावों के बीच अधिक लचीला बनाने की कोशिशों को बल मिल सकता है। भारत-रूस का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
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