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India Afghanistan Relations: भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने मिशन को दूतावास के स्तर पर किया उन्नत, विदेश मंत्री जयशंकर ने की बड़ी घोषणा

India Afghanistan Relations:  अफगानिस्तान और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी के साथ बैठक के दौरान एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि भारत, काबुल स्थित तकनीकी मिशन को अब पूर्ण रूप से भारतीय दूतावास के स्तर पर उन्नत कर रहा है। यह फैसला भारत-अफगानिस्तान संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है।

अफगानिस्तान की संप्रभुता को भारत का समर्थन

बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने दोहराया कि भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का सहयोग न केवल अफगानिस्तान के राष्ट्रीय विकास में मददगार है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता और लचीलापन बढ़ाने में भी सहायक है।

काबुल में भारत का मजबूत कूटनीतिक संकेत

जयशंकर ने कहा,“मुझे आज काबुल स्थित भारत के तकनीकी मिशन को भारतीय दूतावास के स्तर पर उन्नत करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।”यह घोषणा भारत के अफगानिस्तान के प्रति दीर्घकालिक दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद, भारत ने अपने राजनयिकों को काबुल से हटा लिया था और केवल एक तकनीकी मिशन के माध्यम से सीमित संपर्क बनाए रखा था। अब दूतावास स्तर की यह बहाली स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अफगानिस्तान में फिर से सक्रिय और स्थायी राजनयिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण में भारत की भूमिका

भारत ने हमेशा अफगानिस्तान में शांति, पुनर्निर्माण और विकास के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाई है। चाहे वो जरणज-डेलाराम सड़क परियोजना हो, सलमा डैम (India-Afghanistan Friendship Dam) या अफगान संसद भवन का निर्माण, भारत ने लाखों डॉलर की सहायता से अफगान समाज को मजबूती दी है।हाल ही में भारत ने मानवीय आधार पर गेहूं, दवाइयाँ और अन्य राहत सामग्री भी भेजी थी, जिससे संकट में फंसे अफगान नागरिकों को राहत मिली।

अफगान विदेश मंत्री मुत्ताक़ी की भारत यात्रा

अमीर खान मुत्ताक़ी भारत की 7 दिवसीय यात्रा पर आए हैं। यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि तालिबान नेतृत्व भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारने और आगे बढ़ाने की मंशा रखता है। बैठक में व्यापार, सुरक्षा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भारत द्वारा काबुल में तकनीकी मिशन को दूतावास में उन्नत करना सिर्फ एक कूटनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि अफगानिस्तान के साथ रिश्तों को फिर से स्थायित्व देने का सशक्त संकेत है। यह न केवल भारत की उदार विदेश नीति को दर्शाता है, बल्कि अफगानिस्तान की भविष्य की स्थिरता और विकास में भारत की भूमिका को भी और मजबूत करता है।

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