India-US Trade Deal
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच एक नए व्यापारिक युग की शुरुआत हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय नेतृत्व के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा दी है। इस डील की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत के डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, जबकि औद्योगिक और श्रम-आधारित निर्यात के लिए बड़े फायदे सुनिश्चित किए गए हैं। इस समझौते के तहत भारत के लगभग 40 अरब डॉलर से अधिक के उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में बिना किसी टैक्स (जीरो ड्यूटी) के प्रवेश कर सकेंगे। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने और वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर जो 25% का पेनल्टी टैरिफ लगाया गया था, उसे अब कुछ ही दिनों में हटा लिया जाएगा। इसके साथ ही, कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और केमिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर लगने वाले टैक्स को भी कम करने का निर्णय लिया गया है। पहले जिन उत्पादों पर 25% या उससे अधिक टैक्स लगता था, उसे घटाकर अब 18% कर दिया जाएगा। 2024 के द्विपक्षीय व्यापार डेटा के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि इससे करीब 30 अरब डॉलर के श्रम-आधारित भारतीय सामान को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की मांग अमेरिकी बाजारों में तेजी से बढ़ेगी।
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बड़ी बढ़त मिलने वाली है। अब तक भारतीय सामानों पर टैक्स करीब 50% तक पहुँच रहा था, जबकि अन्य एशियाई देशों पर यह केवल 19-20% था। अब इस डील के बाद भारतीय उत्पादों पर प्रभावी ड्यूटी कम हो जाएगी, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस पर गर्व जताते हुए कहा कि यह डील हर भारतीय के हितों की रक्षा करती है। इसमें ‘सेंसिटिव’ सेक्टर को सुरक्षा देते हुए निर्यात से जुड़े क्षेत्रों के लिए मुनाफे के नए अवसर तलाशे गए हैं।
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीयर के अनुसार, भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ घटाने पर सहमति दी है। भारत के इंडस्ट्रियल गुड्स पर टैरिफ अब 13.5% से घटकर शून्य हो जाएगा। वहीं, अमेरिका भारत को अधिक मात्रा में कृषि उत्पाद बेचने की योजना बना रहा है, जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों की आय में वृद्धि होगी। 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था, जिसे कम करने के लिए यह डील महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, भारत ने अपनी बढ़ती आबादी और खाद्य सुरक्षा को देखते हुए अनाज, मक्का और डेयरी जैसे क्षेत्रों पर अपनी सुरक्षात्मक ड्यूटी को बरकरार रखा है।
इस समझौते में भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद का संकल्प लिया है। इसमें मुख्य रूप से विमानन क्षेत्र के लिए 100 अरब डॉलर के हवाई जहाज और पुर्जे, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) शामिल हैं। यह सौदा भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। स्टील और एल्युमिनियम जैसे वैश्विक विवादित विषयों पर सुरक्षात्मक शुल्क जारी रहेंगे, लेकिन फार्मा और मोबाइल फोन जैसे उत्पाद पहले की तरह टैक्स-फ्री बने रहेंगे।
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