India US Trade Deal
India US Trade Deal: अमेरिका के वाणिज्य सचिव की हालिया टिप्पणियों और प्रस्तावित टैरिफ बिल को लेकर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक विस्तृत बयान जारी कर अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक वार्ताओं और भारत की स्वतंत्र ऊर्जा नीति पर अपना रुख साफ किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देश एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन हालिया खबरों में चर्चाओं का जो चित्रण किया गया है, वह पूरी तरह सटीक नहीं है।
भारत ने कहा कि दोनों देश पिछले साल 13 फरवरी से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं। तब से अब तक वार्ताओं के कई दौर हो चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, कई मौकों पर दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब भी पहुँचे। भारत का मानना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं और भारत एक ऐसे समझौते में रुचि रखता है जिससे दोनों पक्षों को समान लाभ हो। खबरों में चल रही अटकलों को खारिज करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि बातचीत की प्रक्रिया सतत है और इसे पूरा करने के लिए भारत तत्पर है।
भारत ने उन दावों को भी स्पष्ट किया जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार समझौते के लिए राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क किया है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 2025 के दौरान कुल 8 बार फोन पर बातचीत हुई है। इन वार्ताओं में भारत-अमेरिका व्यापक साझेदारी के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। हालांकि, पीएम मोदी ने व्यापार समझौते के विशेष संदर्भ में ट्रंप को फोन नहीं किया था। यह स्पष्टीकरण उन अफवाहों पर विराम लगाने के लिए दिया गया है जो प्रधानमंत्री के संवाद को ‘मदद की गुहार’ के रूप में पेश कर रही थीं।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 500 फीसदी टैरिफ बिल, जो रूसी तेल आयात करने वाले देशों को लक्षित करता है, उस पर भारत ने कड़ा स्टैंड लिया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “एनर्जी सोर्सिंग (ऊर्जा के स्रोत) के सवाल पर हमारा रुख जगजाहिर है।” भारत वैश्विक बाजार के बदलते समीकरणों के आधार पर निर्णय लेता है। भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए भारत अलग-अलग स्रोतों से सस्ती और सुलभ ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी रणनीति पर कायम रहेगा।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी भी विदेशी दबाव या टैरिफ की धमकी के कारण नहीं बदलेगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दुनिया भर के बाजारों पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि देश के आम लोगों को सस्ती बिजली और ईंधन मुहैया कराया जाए। यह बयान दर्शाता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा।
निष्कर्षतः, भारत ने अमेरिका को यह संदेश दे दिया है कि वह सहयोग के लिए तैयार है लेकिन शर्तों पर नहीं। जहाँ एक ओर भारत व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी ओर वह अपनी आंतरिक जरूरतों और संप्रभु फैसलों की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश टैरिफ विवादों को सुलझाकर कैसे एक साझा आर्थिक रोडमैप तैयार करते हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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