India vs Pakistan match : हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देशभर में इस हमले की निंदा के बीच क्रिकेट जगत के एक वर्ग ने पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के क्रिकेट मैच पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस माहौल में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले लीजेंड्स लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का मैच विवादों में आ गया है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मैच को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा विरोध दर्ज किया है। उन्होंने बीसीसीआई और केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस समय भारत को पाकिस्तान से किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए, फिर चाहे वह क्रिकेट ही क्यों न हो।
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “बिल्कुल बेशर्मी! नमस्ते गोल (सरकार), मैं पाकिस्तान से कोई रिश्ता नहीं रखूँगी, क्या बात है? आप अभी तक पहलगांव के आतंकवादियों को पकड़ नहीं पाए हैं। लेकिन इस बीच आप भारत-पाक क्रिकेट मैच शुरू करने के लिए बेताब हैं। कम से कम उन परिवारों के बारे में सोचिए जिनके प्रियजन आतंकी हमलों में मारे गए हैं।”
प्रियंका ने बीसीसीआई और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) पर भी हमला बोलते हुए कहा, “नमस्ते बीसीसीआई, नमस्ते आईसीसी — आप खून के पैसे के पीछे भागकर अपना नैतिक दिवालियापन दिखा रहे हैं।” उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया है, जहाँ कई लोग उनके समर्थन में दिखाई दे रहे हैं।
लीजेंड्स चैंपियनशिप के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच 20 जुलाई को मुकाबला होना तय है। भारतीय टीम में शिखर धवन, इरफान पठान, यूसुफ पठान, अंबाती रायडू, रॉबिन उथप्पा जैसे दिग्गज शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान की कप्तानी शाहिद अफरीदी करेंगे। अन्य खिलाड़ियों में सरफराज खान, सईद अजमल और सोहेल खान भी शामिल हैं।
क्रिकेट मैच से पहले ही सोशल मीडिया पर दोनों देशों के पूर्व खिलाड़ियों के बीच जुबानी जंग शुरू हो चुकी है। पहलगांव हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद शिखर धवन और शाहिद अफरीदी के बीच शब्दों की तकरार देखी गई थी, जिसे अब लोग मैदान में उतरने से पहले की ‘साइकोलॉजिकल वॉर’ बता रहे हैं।
गौरतलब है कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ वैश्विक मंचों पर सख्त रुख अपनाने के लिए जो भारतीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया गया था, उसमें प्रियंका चतुर्वेदी भी शामिल थीं। ऐसे में उनका विरोध इस क्रिकेट मैच को केवल खेल तक सीमित न मानकर एक नैतिक मुद्दा माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद में अब तक केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई सोशल मीडिया यूज़र्स और राजनीतिक विश्लेषक यह पूछ रहे हैं कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख क्यों नहीं ले रही है।
भारत-पाक क्रिकेट मैच पर उठे सवाल सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रह गए हैं। यह मामला अब नैतिकता, सुरक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) का विरोध दर्शाता है कि देश में ऐसे मुद्दों पर भावनाएँ गहराई से जुड़ी होती हैं, और सरकार और खेल संगठनों को अपने फैसलों में जनभावनाओं का सम्मान करना होगा।
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