LPG Ships Return
LPG Ships Return: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच भारत के लिए एक अत्यंत राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारतीय ध्वज वाले दो विशाल लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकरों—‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’—को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, एलपीजी की एक बड़ी खेप लेकर आ रहे ये दोनों जहाज अब उस खतरनाक क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं और तेजी से भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत के लिए यह कूटनीतिक जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कई हिस्सों में इन दिनों रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दिलाना कोई संयोग नहीं था, बल्कि यह भारतीय और ईरानी नेतृत्व के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही गहन कूटनीतिक बातचीत का परिणाम है। भारत सरकार ने अपने ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए ईरान के साथ उच्च स्तरीय संवाद स्थापित किया था। क्षेत्र के अन्य देशों के सहयोग और ईरान की विशेष अनुमति के बाद ही इन जहाजों को बिना किसी बाधा के निकलने दिया गया। शुक्रवार शाम भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने पत्रकारों से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की थी कि ईरान भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तुरंत बाद इन जहाजों की रवानगी का रास्ता साफ हुआ।
पिछले कुछ हफ्तों से देश के विभिन्न राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों की खबरें सुर्खियां बटोर रही थीं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण लोगों में यह डर बैठ गया था कि आने वाले समय में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है। हालांकि, भारत सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि गैस का कोई वास्तविक अभाव नहीं है और यह स्थिति केवल ‘पैनिक बुकिंग’ के कारण पैदा हुई है। ऐसे में ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ का सुरक्षित पहुंचना बाजार में स्थिरता लाने और उपभोक्ताओं के बीच फैले डर को कम करने में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह समुद्री संकरा रास्ता है जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है। वर्तमान युद्ध की स्थिति में यह रास्ता एक युद्धक्षेत्र में तब्दील हो चुका है, जहाँ जहाजों पर हमले का खतरा लगातार बना रहता है। ईरान द्वारा भारतीय जहाजों को सुरक्षा देना न केवल दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि संकट के समय में भारत की तटस्थ और रणनीतिक विदेश नीति कितनी प्रभावी रही है। राजदूत फतहाली ने भी इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत और ईरान पुराने मित्र हैं और उनके हित आपस में जुड़े हुए हैं।
ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने जहाजों को रास्ता देने के फैसले को मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि ईरान और भारत के साझा हित एक समान हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध के बाद पैदा होने वाली स्थितियों में भारत विभिन्न क्षेत्रों में ईरान के पुनर्निर्माण और विकास में सहयोग करेगा। यह बयान संकेत देता है कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति में भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई है। अब जबकि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में रसोई गैस का वितरण सामान्य हो जाएगा और आम आदमी को राहत मिलेगी।
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