कारोबार

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के कमजोर आंकड़ों से मिली राहत

Rupee vs Dollar: सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। जहाँ एक ओर शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा, वहीं भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शानदार रिकवरी दिखाई। गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 38 पैसे की मजबूती दर्ज करते हुए 90.40 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुँच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश के प्रवाह में सुधार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाजार में किए गए संभावित हस्तक्षेप ने रुपये को गिरने से बचाया और उसे आवश्यक समर्थन प्रदान किया। इससे पहले बुधवार को रुपया 90.78 के स्तर पर बंद हुआ था, जिससे आज की बढ़त और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

रुपये की मजबूती के पीछे के प्रमुख कारण: डॉलर इंडेक्स में गिरावट

रुपये में आई इस तेजी का मुख्य श्रेय अमेरिका से आए कमजोर आर्थिक आंकड़ों को दिया जा रहा है। अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार (Non-Farm Payroll) और खुदरा बिक्री के आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिसके कारण वैश्विक बाजार में डॉलर की मांग घट गई। डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.05 प्रतिशत गिरकर 96.78 पर आ गया। डॉलर की इस कमजोरी ने भारतीय रुपये के लिए जमीन तैयार की।

चुनौतियों के बीच संतुलन: कच्चा तेल और भू-राजनीतिक तनाव

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, रुपये का सफर इतना आसान नहीं रहा है। आयातकों की ओर से डॉलर की निरंतर मांग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने मुद्रा पर दबाव बनाए रखा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ाई है। ब्रेंट क्रूड वर्तमान में 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 69.69 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें रुपये को कमजोर करती हैं, लेकिन वर्तमान में डॉलर की कमजोरी इस प्रभाव को बेअसर कर रही है।

आरबीआई की रणनीति: बैंकिंग सिस्टम में तरलता और स्थिरता

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि वर्तमान में भले ही विदेशी संस्थागत निवेश (FII) का प्रवाह बहुत अधिक न हो, लेकिन आरबीआई की सक्रियता ने बाजार में मनोवैज्ञानिक स्थिरता पैदा की है। रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित कर रहा है कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) की कोई कमी न हो, ताकि मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया आज 90.55 पर खुला था और कारोबार के दौरान इसने 90.40 का उच्च स्तर छुआ, जो यह दर्शाता है कि बाजार में रुपये को लेकर भरोसा लौट रहा है।

शेयर बाजार बनाम मुद्रा बाजार: विरोधाभासी संकेतों का दौर

दिलचस्प बात यह है कि जहाँ मुद्रा बाजार में रुपये ने दम दिखाया, वहीं घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आया। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 349.87 अंक गिरकर 83,883.77 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 106.60 अंक फिसलकर 25,847.25 पर पहुँच गया। हालांकि, बुधवार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार में 943.81 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी, जो एक सकारात्मक संकेत है। कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा बाजार और शेयर बाजार के विरोधाभासी संकेतों के बीच निवेशकों की नजरें अब वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

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