Rupee vs Dollar 2026
Rupee vs Dollar 2026 : वैश्विक अर्थव्यवस्था में बुधवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जिसका सीधा और सकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने भारतीय रुपए को एक नई संजीवनी प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक ही झटके में 61 पैसे मजबूत हो गया। दिन के कारोबार की समाप्ति पर रुपया 94.57 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह कमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए व्यापार घाटे को कम करने में सहायक सिद्ध होगी, जिससे मुद्रा बाजार में रुपए की मांग बढ़ी है।
रुपए की इस मजबूती के पीछे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का बड़ा हाथ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि ईरान के साथ एक पूर्ण और अंतिम समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है। इस सकारात्मक संकेत के बाद, ट्रंप ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। बता दें कि यह ऑपरेशन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को अमेरिकी सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था। ट्रंप के इस रुख से खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गईं और बाजार का सेंटिमेंट मजबूत हुआ।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बुधवार को रुपए की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रही। रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर पर खुला था, लेकिन शुरुआती कारोबार में दबाव के चलते यह फिसलकर 95.18 के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, जैसे ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की खबर पुख्ता हुई, रुपए ने शानदार रिकवरी की। अंततः यह पिछले बंद स्तर 95.18 से 61 पैसे की बढ़त के साथ 94.57 पर बंद होने में सफल रहा। इससे पहले मंगलवार को यूएई के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और खाड़ी में तनाव के कारण रुपया 95.44 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन शांति वार्ता की खबरों ने बाजी पलट दी।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी रुपए की गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। फॉरेक्स ट्रेडर्स और सीएफओ एडवाइजर्स के अनुसार, केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का सीधे इस्तेमाल करने के बजाय “अप्रत्यक्ष” तरीकों पर काम कर रहा है। इसमें सरकारी बैंकों को विदेशी मुद्रा बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है, ताकि बैंकिंग सिस्टम में नए डॉलर का प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स में भी 0.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अब 97.79 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर की कमजोरी ने भी रुपए की स्थिति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रुपए और कच्चे तेल के सकारात्मक संकेतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। सेंसेक्स 940 अंकों की छलांग लगाकर 77,958 के पार बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 24,330 के स्तर को पार कर गया। इसके साथ ही, आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए एक और अच्छी खबर आई है। अप्रैल महीने में भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) की वृद्धि दर पांच महीने के उच्चतम स्तर 58.8 पर पहुंच गई है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के आंकड़े बताते हैं कि नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी आई है। पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय कंपनियों ने विदेशी सप्लायर्स के बजाय घरेलू आपूर्तिकर्ताओं पर भरोसा जताया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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