India GDP Growth : वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8% की शानदार वृद्धि दर्ज की है। यह न केवल पिछले साल की इसी अवधि के 6.5% के आंकड़े से बेहतर है, बल्कि विशेषज्ञों के अनुमानित 6.7% वृद्धि को भी पीछे छोड़ता है। इसके साथ ही भारत ने चीन की 5.2% की विकास दर को पछाड़ते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था का खिताब एक बार फिर अपने नाम किया है।

पिछले 5 तिमाहियों में सबसे तेज ग्रोथ
यह आंकड़ा पिछले पांच तिमाहियों में सबसे तेज है, जो भारत की मजबूत आर्थिक नींव और नीतिगत स्थिरता का प्रमाण है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ जैसे संरक्षणवादी उपायों से जूझ रही है, भारत का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है।

ग्रोथ के पीछे ये हैं मुख्य कारण
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे कई अहम कारक हैं:बुनियादी ढांचे पर जोर: सड़क, राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे जैसे क्षेत्रों में सरकारी निवेश ने निर्माण क्षेत्र और रोजगार को बढ़ावा दिया।ग्रामीण मांग में सुधार: अच्छी फसल और सरकारी योजनाओं से ग्रामीण खपत में इजाफा हुआ।निजी खपत में वृद्धि: शहरी मध्यम वर्ग की खरीदारी शक्ति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती ने उपभोग को बढ़ाया।तकनीकी नवाचार: AI, स्टार्टअप और डिजिटल भुगतान जैसी नई तकनीकों ने कारोबारी गतिविधियों को आसान बनाया। हालांकि, निजी निवेश और शहरी मांग में अभी भी कुछ सुस्ती देखी जा रही है, लेकिन समग्र रूप से देश की आर्थिक गति बनी हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
आरबीआई सहित कई आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 6.3% से 6.8% के बीच रह सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में ब्याज दरों में कटौती कर विकास को और बढ़ावा देने की कोशिश की है। सरकार की टैक्स छूट, मेक इन इंडिया, पीएलआई योजनाएं और एफडीआई को आकर्षित करने वाली नीतियां भी इस वृद्धि को टिकाऊ बनाने में सहायक हो रही हैं।
IMF का बड़ा अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत 2025 के अंत तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह संकेत करता है कि भारत न केवल वर्तमान में तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से भी वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है।
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