IndiGo Crisis
IndiGo Crisis: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पर अब संकट का नया दौर मंडरा रहा है। दिसंबर महीने में ही 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द होने और हजारों यात्रियों के देश भर के एयरपोर्टों पर फंसे रहने की घटनाओं के बाद, अब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI – Competition Commission of India) एयरलाइन पर एंटीट्रस्ट जांच शुरू करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह जांच यह पता लगाने के लिए की जा सकती है कि क्या इंडिगो ने अपने बड़े बाजार प्रभुत्व (Market Dominance) का गलत इस्तेमाल किया और यात्रियों के लिए सेवाओं में बाधा डाली या उन पर अनुचित शर्तें थोपीं।
सूत्रों ने बताया कि कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया इस पूरे मामले पर करीब से नजर रख रहा है। CCI जल्द ही यह तय करेगा कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की व्यापक जांच शुरू की जाए या नहीं। इंडिगो का देश के घरेलू एयरलाइन मार्केट में लगभग 65% हिस्सा है, जो उसे एक प्रमुख या ‘डोमिनेंट’ कंपनी का दर्जा देता है। किसी भी डोमिनेंट कंपनी के लिए बाजार में अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग करना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उल्लंघन माना जाता है। वहीं, भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस परिचालन संकट की व्यापक जांच का नेतृत्व पहले से ही कर रहा है।
इंडिगो को क्रू शॉर्टेज (पायलटों की कमी) का सामना करना पड़ा क्योंकि वह पायलटों के लिए लागू नए आराम नियमों (New Rest Rules) को सही तरीके से लागू नहीं कर पाई। क्रू शॉर्टेज के कारण ही दिसंबर के पहले हफ्तों में 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, एयरलाइन को कुल 2,422 कैप्टन्स (पायलट) की आवश्यकता थी, लेकिन उसके पास केवल 2,357 ही थे, जिससे परिचालन पर गंभीर असर पड़ा।
डीजीसीए ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और सीओओ इसाइड्रे पोरक्वेरास को शो-कॉज नोटिस भेजा था और 24 घंटे में जवाब देने को कहा था। हालांकि, एयरलाइन ने जवाब दिया कि उनका नेटवर्क बहुत बड़ा और जटिल है, इसलिए तुरंत जवाब देना मुश्किल है। इस वजह से उन्होंने डीजीसीए से 15 दिन का समय माँगा, जो नियमों के तहत सही है।
कॉम्पिटिशन एक्ट की धारा 4 के मुताबिक, कोई भी बड़ी या प्रमुख कंपनी अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग नहीं कर सकती। इस धारा के तहत कंपनियों पर यह प्रतिबंध है कि वे: अपने फायदे के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण नियम बनाएँ। किसी सेवा या उत्पाद की आपूर्ति में बाधा डालें।ग्राहकों पर अनुचित शर्तें थोपें।
यदि CCI को प्रारंभिक जांच में यह लगता है कि इंडिगो अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग कर रही है, तो वह पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू करने का आदेश दे सकती है।
यह पहली बार नहीं है जब इंडिगो एंटीट्रस्ट जांच के घेरे में आई है। हालांकि, 2015 और 2016 में दर्ज दो अलग-अलग मामलों—एक व्यक्तिगत शिकायत (यात्रियों पर अनुचित शर्तें लगाने को लेकर) और दूसरा एयर इंडिया की शिकायत (भर्ती में अपमानजनक तरीके) को CCI ने विस्तृत जांच के बाद खारिज कर दिया था। लेकिन वर्तमान मामला सीधे ग्राहकों को दी जाने वाली सेवा में बड़े पैमाने पर आई बाधाओं से जुड़ा है, जो इसे पहले के मामलों से अलग और अधिक गंभीर बनाता है।
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