Indore News
Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर से लापरवाही की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। लगातार आठ वर्षों तक देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतने वाला और ‘वॉटर प्लस’ का तमगा हासिल करने वाला इंदौर अब दूषित पेयजल के कारण बदनामी के घेरे में है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला और गंदा पानी पीने से अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस भीषण लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम के अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में 24 दिसंबर से उल्टी-दस्त की शिकायतें आनी शुरू हुई थीं। देखते ही देखते मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। मृतकों में सीमाबाई प्रजापत, उर्मिला यादव और 75 वर्षीय नंदलाल पाल शामिल हैं। सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर 3 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों और परिजनों का दावा है कि संख्या 5 तक पहुँच गई है। नंदलाल पाल को उल्टी-दस्त के बाद गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई। हालांकि डॉक्टरों ने मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है, लेकिन परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि दूषित पानी ने ही उनकी सेहत बिगाड़ी थी।
इस त्रासद घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल प्रभाव से नगर निगम के दो अधिकारियों को निलंबित और एक को बर्खास्त करने का आदेश दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि बीमार लोगों के इलाज में कोई कोताही न बरती जाए।
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जिस मुख्य पाइपलाइन से भागीरथपुरा में पेयजल की आपूर्ति होती है, उसके ठीक ऊपर एक सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण ड्रेनेज का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल रहा था। इसके अलावा ढाई करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन डालने के टेंडर 4 महीने पहले ही हो चुके थे, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते काम शुरू नहीं किया गया, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
भागीरथपुरा क्षेत्र प्रदेश के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-एक’ के अंतर्गत आता है। मामला बिगड़ने पर मंत्री स्वयं देर रात अस्पतालों में पहुंचे और मरीजों का हाल जाना। उन्होंने घोषणा की है कि सभी पीड़ितों का इलाज सरकारी खर्च पर होगा और निजी अस्पतालों में जमा कराई गई राशि रिफंड की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र से पानी के 70 से अधिक सैंपल लिए हैं ताकि संक्रमण के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक गंभीर विफलता है और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भागीरथपुरा के निवासी पिछले कई दिनों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन नगर निगम के मैदानी अमले ने इसे अनसुना कर दिया। फिलहाल क्षेत्र में टैंकरों के जरिए साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और मेडिकल टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं।
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